
रायपुर@पीलूराम साहू। Menopause Clinic: प्रदेश की 34 लाख से अधिक 45 प्लस महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी कमी सामने आई है। प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में इनके लिए एक भी 'डेडिकेटेड मेनोपॉज क्लीनिक' संचालित नहीं है। राजधानी के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध आंबेडकर अस्पताल, एम्स, सिम्स बिलासपुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थानों में भी मेनोपॉज के लिए अलग से कोई बोर्ड या क्लीनिक उपलब्ध नहीं है। महिलाओं को सामान्य स्त्री रोग (गाइनी) विभाग की ओपीडी में ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के गायनी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, हर हफ्ते 15 से 20 महिलाएं हॉट फ्लश, रात में अत्यधिक पसीना आना, नींद न आना, जोड़ों का दर्द, मूड स्विंग और थकान की शिकायतें लेकर आती हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं 2 से 3 साल तक लक्षण सहने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, क्योंकि वे इसे सामान्य उम्र का असर मान लेती हैं।
हर साल 18 अक्टूबर को विश्व मेनोपॉज दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम 'मिडलाइफ में क्रॉनिक पेन' है, जिसका मकसद मेनोपॉज को बीमारी नहीं बल्कि जीवन के एक सहज चरण के रूप में देखना है। प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं मुख्य रूप से मातृ व शिशु स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं, जहां मितानिन मॉडल देश भर में सराहा जाता है। लेकिन 70 हजार से अधिक मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण मॉड्यूल में मेनोपॉज और मिडलाइफ महिलाओं की काउंसलिंग के लिए कोई अध्याय शामिल नहीं है।
केस-1: रायपुर की 52 वर्षीय शिक्षिका पिछले दो साल से घुटनों के दर्द और रात में नींद टूटने से परेशान थीं। वे इसे काम का तनाव मानती रहीं। जब डॉक्टर को दिखाया, तब पता चला कि यह मेनोपॉज से जुड़ा है। सही जानकारी और इलाज के बाद अब वे स्वस्थ हैं।
केस-2: रायपुर की 50 वर्षीय गृहिणी को चीजें रखकर भूलने की समस्या (ब्रेन फॉग) हो गई थी। चाबी कहां रखी या क्या बोलना है, ध्यान नहीं रहता था। डॉक्टर को दिखाने पर मेनोपॉज की वजह सामने आई और इलाज से स्थिति में सुधार हुआ।
रितेश अग्रवाल, कमिश्नर, मेडिकल एजुकेशन के मुताबिक, अभी देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही मेनोपॉज डेडिकेटेड क्लीनिक का संचालन हो रहा है। प्रदेश में इसकी जरूरत होगी तो आंबेडकर समेत दूसरे बड़े मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में क्लीनिक खोली जाएंगी, ताकि 45 प्लस महिलाओं को मेनोपॉज के बाद इलाज कराने में आसानी हो।
डॉ. सारिका साहू, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन व अन्य हार्मोंन में गिरावट आती है। हड्डियों की कमजोरी व हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसकी समय रहते जांच व रोकथाम जरूरी है। एंजाइटी, तनाव व डिप्रेशन से निपटने के लिए इलाज के साथ काउंसिलिंग भी जरूरी है। चूंकि मेनोपॉज लंबे समय तक चलता है इसलिए इसकी अलग से क्लीनिक की जरूरत है, ताकि डॉक्टर महिलाओं की आराम से काउंसिलिंग कर सकें।