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पत्रिका एक्सक्लूसिव: बंगाल के दुर्गोत्सव में छत्तीसगढ़ी पंडवानी का गूंजा स्वर, तीजनबाई को समर्पित रही थीम

Chhattisgarhi Pandavani: बंगाल के दुर्गोत्सव में इस बार छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पंडवानी को खास सम्मान मिला। कोलकाता के सिकदार बागान सार्वजनिक पूजा में पंडवानी गायिका तीजनबाई की कला को थीम बनाया गया।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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ताबीर हुसैन

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Oct 18, 2026

Pandavani Performance

बंगाल के दुर्गोत्सव में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का संगम (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ ताबीर हुसैन। Kolkata Durga Puja: दुर्गोत्सव की भव्यता के बीच छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पंडवानी की गूंज ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सिकदार बागान साधारण दुर्गोत्सव कोलकाता में इस बार पंडवानी की विश्वप्रसिद्ध गायिका तीजनबाई की कला को थीम के रूप में प्रस्तुत किया गया। पंडाल के जरिए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा को बंगाल के दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

आयोजन से जुड़े सायक दास ने बताया कि तीजनबाई पंडवानी गायन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाली कलाकार हैं। उनकी कला और योगदान से लोगों को परिचित कराने के उद्देश्य से दुर्गोत्सव की थीम उनके जीवन और पंडवानी पर केंद्रित रखी गई। आयोजकों की कोशिश थी कि छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोकविधा के बारे में भी जानें।

पंडाल के सामने गूंजी पंडवानी

थीम को जीवंत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ से कुछ कलाकारों को आमंत्रित किया गया। इन कलाकारों ने पंडाल के सामने पंडवानी गायन की प्रस्तुतियां दीं, जिसमें गायिका शिवकुमारी पटेल व संगीत से जुड़े कलाकार शामिल हुए। इससे दर्शकों को लोकगायन की शैली, उसकी प्रस्तुति और सांस्कृतिक परंपरा को करीब से देखने-सुनने का अवसर मिला। पंडाल की सज्जा और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित न रखकर सांस्कृतिक अनुभव का रूप दिया। कलाकारों को कोलकाता भेजने में रायपुर से अलीम बंशी ने सहयोग किया।

तीजनबाई की विरासत से परिचित कराने की पहल

आयोजकों के मुताबिक, इस थीम का मुख्य उद्देश्य तीजनबाई की कला और पंडवानी की विरासत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था। दुर्गोत्सव में बड़ी संख्या में लोग पंडाल देखने पहुंचे। इस पहल ने बंगाल के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को सामने लाने का अवसर दिया। पंडवानी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण लोकगायन परंपरा है, जिसमें गायन, कथावाचन और अभिनय के माध्यम से महाभारत की कथाएं प्रस्तुत की जाती हैं।