रायपुर

CG Board: लापरवाह माध्यमिक शिक्षा मंडल, अंकसूची में नाम सुधरवाने का चक्कर काट रहे छात्र-छात्राएं

CG Board: माशिमं के अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। त्रुटि सुधार का काम ऑनलाइन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को कार्यालय में आकर ऑफलाइन आवेदन करना पड़ रहा है।

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Apr 11, 2026

CG Board: रायपुर बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद भी अंकसूची में नाम सुधरवाने के लिए छात्र-छात्राओं की परीक्षा ली जा रही है। अंकसूची में विद्यार्थियों के गलत नाम प्रिंट हो रहे हैं। इससे उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अपना नाम सुधरवाने के लिए विद्यार्थियों को माध्यमिक शिक्षा मंडल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

अंकसूची सुधारने के लिए 500 से 2600 तक शुल्क देना पड़ रहा है, तो दूसरी ओर लंबी दूरी तय करके उन्हें आना पड़ रहा है। ऊपर से अंकसूची सुधारने का काम एक ही बार में नहीं होता है। इसके लिए कई बार चक्कर काटना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की इन समस्याओं को लेकर बोर्ड के अधिकारी भी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कई सालों से यह समस्या चली आ रही है।

अधिकारियों की अनदेखी, भुगत रहे स्टूडेंट्स

माशिमं के अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। त्रुटि सुधार का काम ऑनलाइन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को कार्यालय में आकर ऑफलाइन आवेदन करना पड़ रहा है। त्रुटि सुधारने की समय सीमा तय नहीं की गई है। यही वजह है कि अधिकारी मनमर्जी से महीनों का समय लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बोर्ड परीक्षा के समय विद्यार्थी फार्म भरते हैं। इनमें वे अपना नाम, सरनेम सही भरते हैं, लेकिन अंकसूची में गलत छपा मिलता है। बताया जाता है कि अंकसूची प्रिंट करने और उसमें बच्चों के नाम लिखते समय गड़बड़ी की जाती है।

रोज 30-35 शिकायतें

10वीं-12वीं की अंकसूचियों में गड़बड़ी की कई शिकायते हैं। सूत्रों के मुताबिक रोज 30-35 शिकायतें आ रही हैं। इनमें नाम के स्पेलिंग से लेकर सरनेम नहीं लगाने जैसी शिकायतें हैं। इन्हें सुधारने में काफी समय लेते हैं। कई चक्कर लगवाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दूसरे जिलों से राजधानी पहुंचने वालों को होती है।

केस-1, फोटो

बेरला की जिज्ञासा साहू वर्तमान में कॉलेज छात्रा है। उनकी दसवीं और बारहवीं की अंकसूची में नाम की स्पेलिंग में त्रुटि है। इसे सुधरवाए बिना वे स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं भर पा रहीं हैं। अंकसूची में नाम सुधरवाने के लिए उनके पिता तोमन साहू तीन बार बोर्ड ऑफिस के चक्कर काट चुके हैं। गुरुवार को भी अपने साथी के साथ पहुंचे थे। काउंटर में उन्हें कहा गया कि बाद में आएं। वे निराश होकर बेरला लौट गए।

केस-2, फोटो

बिलासपुर निवासी रिशु एडवर्ड की 10वीं की अंकसूची में उनके नाम की स्पेलिंग में त्रुटी है। इसे सुधरवाने के लिए 25 नवंबर 2025 को माशिमं में आवेदन दिया था, लेकिन अब तक नहीं सुधारा गया। उनसे स्थायी जाति प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, जबकि उनके पास अस्थायी जाति प्रमाण पत्र है। रिशु अपने दोस्त के साथ बोर्ड ऑफिस के कई चक्कर काट चुके हैं। गुरुवार को इसी काम के लिए रिशु को मुंबई से बिलासपुर फिर रायपुर आना पड़ा।

केस-3

दुर्ग निवासी विनोद को 10वीं की अंकसूची में अपने सरनेम जुड़वाने हैं। पहले उनसे तमाम दस्तावेज लिए गए और 600 शुल्क बताया गया। इसके बाद उनसे 2600 लिया गया। साथ ही अंकसूची सुधरने में 4 महीने का वक्त लगने की जानकारी दी गई।

केस-4

भिलाई निवासी रागिनी ने पिछले साल 10 वीं उत्तीर्ण की है। उनकी अंकसूची में नाम की स्पेलिंग गलत है। साथ ही उनका सरनेम भी नहीं लिखा था, जबकि आवेदन फार्म में उन्होंने सही भरा था। वह भी कई बार माशिमं कार्यालय के चक्कर काट चुकी हैं। हर बार उन्हें अलग-अलग जानकारी दी जाती है।

स्कूल वाले करते हैं गलतियां। कौन-कौन से मामले हैं हमें बताओ।

-पुष्पा साहू, सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर

Updated on:
11 Apr 2026 02:52 pm
Published on:
11 Apr 2026 02:51 pm
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