रायपुर

New Girdawari Rules: गिरदावरी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ सरकार ने किए बड़े बदलाव! अब खेत की फोटो से होगी फसल की पुष्टि

Paddy purchase: छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ फसलों की गिरदावरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब फसल बदलने पर खेत की फोटो मोबाइल ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
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Aug 07, 2026
New Girdawari Rules
New Girdawari Rules: छत्तीसगढ़ में गिरदावरी के नियम हुए सख्त (photo source- Patrika)

New Girdawari Rules: छत्तीसगढ़ में इस बार खरीफ सीजन की गिरदावरी (फसल निरीक्षण) पहले जैसी नहीं होगी। अगर किसान ने धान की जगह दूसरी फसल बोई है या खेत खाली छोड़ दिया है, तो अब सिर्फ कागजों में जानकारी दर्ज करना काफी नहीं होगा। संबंधित खेत की खसरा-वार फोटो खींचकर मोबाइल एप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बार गिरदावरी के लिए डिजिटल निगरानी, सात-स्तरीय भौतिक सत्यापन और तय समय-सीमा वाला नया सिस्टम लागू किया है। इसका उद्देश्य साफ है—खेत में जो फसल है, रिकॉर्ड में भी वही दिखनी चाहिए।

Chhattisgarh Girdawari: क्यों बदला गया गिरदावरी का पूरा सिस्टम?

छत्तीसगढ़ में हर साल धान की सरकारी खरीदी बड़े पैमाने पर होती है। इसके साथ ही उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर जैसी फसलें भी प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत खरीदी जाती हैं। सरकार को कई बार शिकायतें मिलीं कि कुछ मामलों में खेत की वास्तविक फसल और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी अलग-अलग थी। इसका असर सरकारी खरीदी, भुगतान और योजनाओं के लाभ पर भी पड़ता था। इसी वजह से इस बार गिरदावरी को पूरी तरह डिजिटल और जवाबदेह बनाने का फैसला लिया गया है।

अब केवल पटवारी नहीं, सात स्तरों पर होगी जांच

इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गिरदावरी केवल पटवारी तक सीमित नहीं रहेगी। खेतों का सत्यापन सात स्तरों पर किया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना कम हो।

पटवारी अपने हल्के के 100 प्रतिशत कृषि रकबे का सत्यापन करेंगे।
राजस्व निरीक्षक (RI) और कृषि विस्तार अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के 25-25 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार 10 प्रतिशत रकबे का निरीक्षण करेंगे।
अनुविभागीय अधिकारी (SDO) 5 प्रतिशत रकबे का सत्यापन करेंगे।
जिला स्तरीय अधिकारी 1 प्रतिशत रकबे का औचक निरीक्षण करेंगे।
संभाग और राज्य स्तर के अधिकारी भी 0.1 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे।

यानी अब हर स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन होगा और किसी एक अधिकारी की रिपोर्ट पर पूरी प्रक्रिया निर्भर नहीं रहेगी।

फसल बदली तो फोटो अपलोड करना होगा जरूरी

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण नियम यही है। अगर किसान ने धान की जगह दूसरी फसल बोई है या खेत को खाली छोड़ा है, तो संबंधित खेत की फोटो मोबाइल एप के जरिए अपलोड करनी होगी। फोटो खसरा नंबर के आधार पर दर्ज होगी ताकि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान आसानी से किया जा सके। इसका उद्देश्य केवल फोटो लेना नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्य तैयार करना है ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो।

गलती मिली तो कार्रवाई तय

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि गिरदावरी में लापरवाही, गलत डेटा प्रविष्टि या फर्जी जानकारी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। यदि रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया तो केवल पटवारी ही नहीं, बल्कि निरीक्षण करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

समय-सीमा भी तय, देर की गुंजाइश नहीं

गिरदावरी अभियान के लिए इस बार पूरा कैलेंडर जारी किया गया है। 20 सितंबर तक गिरदावरी, डेटा एंट्री और त्रुटि सुधार का कार्य पूरा करना होगा। 25 सितंबर को ग्रामवार फसल क्षेत्र का प्रारंभिक डेटा प्रकाशित किया जाएगा। किसानों की दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद 30 सितंबर तक अंतिम रिकॉर्ड अपडेट कर दिए जाएंगे। इससे किसानों को समय रहते अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा।

गांव-गांव होगी मुनादी

नई व्यवस्था की जानकारी हर किसान तक पहुंचे, इसके लिए गांवों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जाएगी। गिरदावरी के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह के विवाद की गुंजाइश न बचे। गिरदावरी अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखने के लिए संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिन में समीक्षा करेंगे। जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

किसानों पर क्या होगा असर?

नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा ईमानदार किसानों को मिलने की उम्मीद है। खेत में जो फसल होगी, उसी के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे MSP खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी दावों पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा। हालांकि, किसानों के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे गिरदावरी के दौरान अपने खेत की सही जानकारी उपलब्ध कराएं और प्रकाशित प्रारंभिक रिकॉर्ड की जांच कर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज करें।

आने वाले वर्षों में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

छत्तीसगढ़ सरकार की नई गिरदावरी व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि कृषि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड, खेत की फोटो, सात-स्तरीय सत्यापन और तय समय-सीमा के जरिए सरकार फसल खरीदी व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना चाहती है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने और वास्तविक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में यह मॉडल अहम भूमिका निभा सकता है।

Updated on:
07 Aug 2026 01:12 pm
Published on:
07 Aug 2026 01:12 pm