15 साल पुराने एनटीपीसी धोखाधड़ी फर्जीवाडा़ मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व प्रबंधक रहे जयदीप दास को 7 साल की सजा सुनाई है।
रायपुर. नेशनल थर्मल पॉवर कंपनी (एनटीपीसी), कोरबा में प्रबंधक रहे जयदीप दास को सरकार धन के फर्जीवाड़ा करने के आरोप में सीबीआई की विशेष अदालत ने 7 साल की कैद और एक करोड़ रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायधीश पंकज कुमार जैन ने १५ साल पुराने इस प्रकरण की सोमवार को सुनवाई की।
दास ने फर्जी दस्तावेज बनाकर कंपनी के एक करोड़ 61 लाख 83 हजार 242 रुपए की रकम अपनी पत्नी, ससुर और परिचित के बैंक खाते जमा कराई थी। सजा की घोषणा के बाद पुलिस ने जयदीप दास को जेल भेज दिया। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच कर आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया था।
न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी और बचाव पक्ष के 29 गवाहों का बयान लिया। सीबीआई के वकील संजय पिल्ले ने बताया कि मूल रूप से कोलकाता निवासी जयदीप दास (55 वर्ष) एनटीपीसी कोरबा में वित्त एवं लेखा विभाग में प्रबंधक के पद पर पदस्थ था। फैक्ट्री और दफ्तर के लिए अमरीका और इटली से विदेशी सामान खरीदे गए थे।
इसके एवज में नियमानुसार एजेंट को कमीशन की राशि का भुगतान किया गया था। लेकिन, दास ने 1997-1999 के बीच दोबारा कमीशन का फर्जी बिल लगाकर रकम निकाल लिया। ऑडिट के दौरान इसका खुलासा होने मामला सीबीआई को सौंपा गया था। जांच में धोखाधड़ी फर्जीवाडा़ उजागर होने के बाद सीबीआई ने 2002 में इसके खिलाफ आरोपपत्र पेश किया।
सीबीआई के वकील ने बताया कि आरोपपत्र पेश होने के बाद दास 2002 में फरार हो गया था। 2011 में दोबारा कोर्ट में पेश होने के बाद इसकी सुनवाई शुरू हुई। इस मामले में चार आरोपी बनाए गए थे। लेकिन, एक की मृत्यु हो गई और दो अन्य के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।
अब तक सबसे बड़ा जुर्माना
जयदीप दास को सजा के तौर पर लगाया गया एक करोड़ रुपए का जुर्माना एेतिहासिक है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद किसी अदालत ने इतनी राशि का जुर्माना नहीं लगाया है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर आरोपी को ६ माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास काटना पड़ेगा।