रायपुर

महानदी जल विवाद सुलझाने ओडिशा के डिप्टी CM केवी सिंह आएंगे छत्तीसगढ़, सीएम साय के साथ करेंगे बैठक

Mahanadi Controversy: महानदी विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं अब ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर विवाद का निराकरण करने की ठोस पहल की है..
2 min read
• •
Jan 27, 2026
mahandi vivad news
महानदी जल विवाद ( Photo - Patrika )

Mahanadi Controversy: महानदी नदी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लगभग एक दशक से चले आ रहा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों राज्यों के बीच यह टकराव जल बंटवारे और बैराजों के निर्माण को लेकर है। मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में लंबित है। अब चूंकि छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों में भाजपा की सरकार है, इसलिए दोनों सरकार मिलकर विवाद का निराकरण करने की दिशा में ठोस पहल की है।

छत्तीसगढ़ का करेंगे दौरा

दोनों सरकारों के बीच एक-दो दौर की वार्ता भी हो चुकी है। यही वजह है कि अब ओडिशा के डिप्टी सीएम केवी सिंह देव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति छत्तीसगढ़ का दौरा करने वाली है। बताया जाता है कि यह दौरा 31 जनवरी से 1 फरवरी को होने जा रहा है। इस दौरे का मकसद छत्तीसगढ़ के साथ बातचीत करके मुद्दे पर आम सहमति बनाना है।

इस दौरान वे, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। साथ ही महानदी से जुड़े सामाजिक संगठनों से भी चर्चा की जाएगी, ताकि सभी पक्षों की राय को शामिल किया जा सके। बता दें कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र से होता है। यह लगभग 851 किलोमीटर लंबी है और ओडिशा होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

ट्रिब्यूनल में 7 को अगली सुनवाई

महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (एमडब्ल्यूडीटी) की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होनी है, जिसमें दोनों राज्य अपने तर्क पेश करेंगे। न्यायाधिकरण का गठन 12 मार्च 2018 को हुआ था और इसकी अवधि एक-दो महीने में समाप्त हो जाएगी। हालांकि ओडिशा सरकार ने केंद्र से इसकी अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि फैसला देने की प्रक्रिया पूरी हो सके।

यह है महानदी जल विवाद

महानदी जल विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच नदी के पानी के उपयोग और बंटवारे को लेकर उत्पन्न हुआ है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने नदी के ऊपरी हिस्से में बैराज और जल संरचनाएं बनाकर प्राकृतिक प्रवाह को रोक दिया है, जिससे ओडिशा में स्थित हिराकुद बांध और सिंचाई परियोजनाओं को मिलने वाला पानी घट गया है।

यह है छत्तीसगढ़ का पक्ष

छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क है कि उसने कोई भी निर्माण अंतरराज्यीय जल संधि का उल्लंघन करके नहीं किया है। राज्य के अनुसार, सभी परियोजनाएं राज्य के भीतर जल उपयोग के अधिकार के तहत हैं और इनका उद्देश्य पेयजल व सिंचाई है, न कि नदी का प्रवाह रोकना।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला

इस मामले को लेकर वर्ष 2016 में ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) गठित करने का निर्देश दिया। इसके बाद 2018 में ट्रिब्यूनल का गठन हुआ। अब महानदी जल विवाद को लेकर ट्रिब्यूनल का काम यह निर्धारित करना है कि दोनों राज्यों को महानदी का कितना पानी मिलेगा और किन शर्तों पर मिलेगा। साथ ही यह भी तय करेगा कि भविष्य में नई परियोजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे।

यह है खास बातें

नदी: महानदी

उद्गम: सिहावा (छत्तीसगढ़)

लंबाई: लगभग 851 किमी

विवाद: जल बंटवारा और बैराज निर्माण

कानूनी मंच: महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण

स्थिति: फैसला लंबित

Updated on:
27 Jan 2026 05:55 pm
Published on:
27 Jan 2026 05:55 pm