
जशपुरनगर. पत्थलगड़ी को लेकर जशपुर जिले में विवाद दिन पर दिन गहराता जा रहा है। पत्थलगड़ी प्रभावित तीनों गांव कलिया, बुटूंगा और बछरांव के ग्रामीण दहशत में हैं।
हालांकि सिहारडांड़ में समर्थकों ने रविवार को पत्थलगड़ी अभियान आयोजित करने की घोषणा कर रखी थी, लेकिन विरोधियों के सामने आ जाने से इलाके में तनाव फैल गया।
हालांकि सिहारडांड़ और कलिया में प्रस्तावित अभियान को स्थगित करने की बात कही जा रही है, लेकिन अभियान समर्थक और प्रशासनिक अफसरों के पुष्टि न किये जाने से दुविधा की स्थिति बनी रही। इससे पहले तनाव की भनक मिलते ही पुलिस प्रशासन ने मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल के साथ पुलिस अधिकारियों को तैनात कर दिया। इसके बाद बगीचा एसडीएम एचके बघेल और एसडीओपी बगीचा पदमश्री तंवर ने इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों से सीधी बात की।अफसरों ने ग्रामीणों को संविधान की प्रति दिखा कर उन्हें आश्वस्त किया कि जिले में कानून का पूरी तरह से पालन हो रहा है। कलिया में पत्थलगड़ी समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अलग-अलग स्थान पर बैठे हुए थे। वहीं बुटूंगा में पत्थलगड़ी समर्थक जुटने की कोशिश कर रहे थे।
पत्थलगड़ी तोडऩे के विरोध में प्रदेश भर में प्रदर्शन की तैयारी
रायपुर . संविधान की पांचवी अनुसूची लिखी पत्थलगड़ी को तोडऩे के विरोध में आदिवासी समाज लामबंद होने लगा है। सर्व आदिवासी समाज प्रदेश भर में प्रदर्शन की तैयारी में है। ठीक वैसा ही विरोध जैसा भू-राजस्व संहिता संशोधन कानून के विरोध में खड़ा हुआ था। उससे पहले समाज का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से बात कर उन लोगों पर कार्रवाई की मांग करेगा, जिन्होंने जशपुर के बुटुंगा गांव में पत्थलगड़ी को तोड़ा था और बच्छरांव गांव में हमला किया था। सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष बीएस रावटे और पूर्व सांसद सोहन पोटाई की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल रविवार रात बच्छारांव और बुटुंगा पहुंचा।
रावटे ने बताया कि ग्रामीणों में काफी गुस्सा है। वे कह रहे हैं कि अगर सरकार ग्रामसभा के अधिकारों का सम्मान करती तो विरोध जैसी कोई बात होती ही नहीं। हम तो वही बात कह रहे हैं जो संविधान कह रहा है। आसपास के कम से कम 20 गांवों मेंं पत्थल गाड़ दिए गए हैं। जल्दी ही वहां भी संविधान की पांचवी अनुसूची लिखी जाएगी। कुछ लोग ग्रामीणों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। बीएस रावटे ने कहा, वे इसकी रिपोर्ट मुख्य सचिव और राज्यपाल को देंगे। पत्थलगड़ी तोडऩे वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की घोषणा होगी।
सर्व आदिवासी समाज की बस्तर और जशपुर इकाइयों ने सोमवार को ही प्रदर्शन की तैयारी की है। बताया जा रहा है कि यह स्थानीय आक्रोश का नतीजा है। अधिकतर जिला इकाईयों को प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार है।
राजनांदगांव. जशपुर से चली पत्थलगड़ी की हवा अब सीएम डॉ. रमन सिंह के निर्वाचन जिले राजनांदगांव के माओवाद प्रभावित आदिवासी बहुल मानपुर ब्लॉक के करीब आधा दर्जन गांवों में पहुंच गई है। शनिवार को आदिवासी बहुल क्षेत्र मानपुर के कई गांवों में संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों में उल्लेखित बातों को बोर्ड में लिखवाकर ऐलान कर दिया है कि इन इलाकों में शासन और प्रशासन का दखल नहीं चलेगा। यहां पर आदिवासियों का फैसला ही मान्य होगा। आदिवासियों के इस तरह ऐलान के बाद शासन-प्रशासन में हडक़म्प की स्थिति है।
अब पुलिस ने सख्ती से कुछ गांवों में बोर्ड जरूर हटा दिए हैं, लेकिन गांवों में विरोध की आग जमकर सुलग रही है। आदिवासियों ने कीमती आयरन ओर की पहाडिय़ों पर एक छोटा सा मंदिर बनाकर अपने देवता को स्थापित कर दिया है। सर्वआदिवासी समाज के सचिव राजू मरकाम का कहना है कि हम पीछे नहीं हटेंगे और पारंपरिक रूढ़ीप्रथा ग्रामसभा का पालन करते रहेंगे। इधर, राजनांदगांव के एसपी प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि आदिवासियों को कुछ लोग बहकाने का काम कर रहे थे। लोगों को समझा दिया गया है। आदिवासियों ने खुद ही बोर्ड हटा दिए हैं। कोई बड़ा मामला नहीं है।