केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल (ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड ) पर बेसिक उत्पाद शुल्क 2 रुपए प्रति लीटर कम करने का फैसला किया है
अनुपम राजीव राजवैद्य@रायपुर. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच एक राहत वाली खबर आई है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल (ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड ) पर बेसिक उत्पाद शुल्क 2 रुपए प्रति लीटर कम करने का फैसला किया है। अब अनुमानित रूप से पेट्रोल पर 19.48 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगेगा। पेट्रोल-डीजल के दामों में यह कमी 4 अक्टूबर से प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में इसके बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में अनुमानित रूप से 2.50 रुपए की कमी आएगी। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल पर 25 प्रतिशत वैट लगता है।
इससे पहले पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में वृद्धि के कारण रायपुर में पेट्रोल और डीजल का खुदरा बिक्री मूल्य 2 अक्टूबर को बढ़कर क्रमश: 71.33 रुपए प्रति लीटर और 69.86 रुपए प्रति लीटर हो गया। इंडियन ऑयल के मुताबिक 3 अक्टूबर को रायपुर में पेट्रोल 71.30 रुपए प्रति लीटर और डीजल 69.93 रुपए प्रति लीटर के दाम पर बिका। विदित हो कि पेट्रोल-डीजल के दाम इसी साल 16 जून से रोजाना समीक्षा के आधार पर तय किए जाते हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 जुलाई से करीबन रोजाना वृद्धि हो रही थी।
मोदी सरकार के समय 9 बार बढ़ाया उत्पाद शुल्क
सरकार ने उत्पाद शुल्क में पांच साल बाद कटौती की है। इससे पहले यूपीए सरकार ने वर्ष 2012 में पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क घटाया था। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से पेट्रोलियम पदार्थों के बेसिक उत्पाद शुल्क में नौ बार वृद्धि की गई थी। सरकार ने पिछली बार 31 जनवरी 2016 को बेसिक उत्पाद शुल्क में वृद्धि की थी। इस आधार पर पेट्रोल पर 21.48 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 17.33 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगता था।
इसलिए किया फैसला
पेट्रोलियम पदार्थों पर बेसिक उत्पाद शुल्क में 2 रुपए प्रति लीटर कम करने का फैसला कच्चे पेट्रोलियम तेल तथा पेट्रोल और डीजल के बढ़ते अंतरराट्रीय मूल्य के प्रभाव को कम करने के लिए किया गया। साथ ही आम आदमी के हितों की रक्षा के लिए पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खुदरा बिक्री मूल्य को कम करने के लिए किया है। पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में यह वृद्धि थोक मूल्य सूचकांक महंगाई में दिखाई देने लगी थी, जो अगस्त 2017 में बढ़कर 3.24 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2017 में यह 1.88 प्रतिशत थी। इसके कारण सरकार को इस संबंध में तेजी से फैसला लेना पड़ा।
13000 करोड़ का घाटा
केंद्र सरकार के मुताबिक उत्पाद शुल्क में इस कटौती से पूरे एक वर्ष में 26000 करोड़ रुपए का घाटा अनुमानित है। वहीं, वर्तमान वित्त वर्ष के शेष हिस्से के दौरान करीब 13000 करोड़ रुपए का घाटा होगा।