छत्तीसगढ़ की राजनीति में हड़कम्प मचा देने वाले सीडी काण्ड की चार्जशीट किसी भी वक्त दाखिल की जा सकती है।
आवेश तिवारी/रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजनीति में हड़कम्प मचा देने वाले सीडी काण्ड की चार्जशीट किसी भी वक्त दाखिल की जा सकती है। सीबीआई की चार्जशीट के पन्नों में जो कुछ होगा वो सामने आ जाएगा। लेकिन पत्रिका ने अपने इन्वेस्टिगेशन और इस मामले से चर्चा में आये लोगों से बातचीत के आधार पर इस पूरे मामले को समझने की कोशिश की है। दरअसल यह पूरी कहानी नेताओं, अपराधियों और जल्द से जल्द पैसा कमाने की हवस पाल रखे युवाओं के गठजोड़ की है।
विधायक बनने से पहले बना अपराधी
इस कहानी की शुरुआत भाजपा के टिकट को हासिल कर विधानसभा चुनाव में अपने हाथ आजमाने वाले एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं से शुरू होती है। वो व्यक्ति चुनावी राजनीति में पैसे की जरुरत को जानता है सो सबसे पहले रिंकू खनूजा और वीरू नाम के एक कारोबार को पकड़ता है। उक्त कारोबारी विजय पांड्या उर्फ विजय वलम जैसे अपराधियों को पकड़ता है जो खुद भी रातों रात अमीर बनना चाहते हैं। गौरतलब है कि विजय के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के मामले रहे हैं। दिलचस्प यह है कि विजय और रिंकू साथ पढ़-लिखकर निकलते हैं ।
विजय लाख डेढ़ लाख की फिल्मे पहले बना चुका रहता है और मुम्बई फिल्म उद्योग में संघर्ष को जानता है । वहीं रिंकू जो खानदानी रईस होने के बावजूद पैसे की तंगी से जूझ रहा है,यह दोनों युवा उक्त नेता के साथ काम करने को तैयार हो जाते हैं। फिर सवाल खड़ा होता है कि सीडी का निर्माण कैसे किया जाये ? इस मामले से चर्चा में आये लवली खनूजा बताते हैं कि इसी नेता द्वारा एक बार मुझे एक दूसरे नेता का नाम लेकर कहा गया कि उसके फ़ार्म हाउस में कैमरा लगवा दो लेकिन मैंने मना कर दिया।
विरोधियों तक पहुंचाने के नाम पर ब्लैकमेलिंग
इस कहानी का दूसरा हिस्सा चौंकाने वाला है । जब सीडी बन जाती है तो सवाल पैदा होता है कि इसकी खरीद फरोख्त कैसे की जाए? इसका रास्ता भी निकाला जाता है। गिरोह में शामिल नेता सीडी के बनने की सूचना का प्रचार करवाता है। कई बार जब कोई इनके जाल में फंस जाता है तो पैंसे ऐंठ लिए जाते हैं लेकिन जब कोई नहीं फंसता तो उसका राजनैतिक इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में उसे विरोधियों तक पहुंचाने के लिए हथकंडे अपनाए जाते हैं। मंत्री की कथित सीडी के मामले में भी यही हुआ था।
इस सीडी की जानकारी पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी से पहले ही बहुत से लोगों को थी । लेकिन इसे राजनैतिक इस्तेमाल के लिए विनोद वर्मा तक पहुँचाया गया । लेकिन विनोद वर्मा ने इसका राजनैतिक इस्तेमाल न करके इसको मीडिया में देना चाहा इसके पहले उनकी गिरफ्तारी हो गई। सीबीआई की चार्जशीट में दो तरह के लोग हैं । एक वो जो इसके निर्माण और इसको बेचने में शामिल रहे दूसरे वो जिन्होंने सीडी को खऱीदा और उसका प्रचार करने की कोशिश की।
सवाल जो अभी खड़े हैं
कैलाश मोरारका - इनको सीडी के निर्माण की जानकारी 2012 से थी इन्होने इसकी सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी?
विजय पांड्या - इसके अभी हाल तक रायपुर में होने की खबर थी इसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?
रिंकू खनूजा - यह केवल एक मोहरा था जिसका इस्तेमाल किया गया फिर इसने आत्महत्या क्यों की?
लवली खनूजा - लवली खनुजा ने जानकारी के बावजूद सीडी काण्ड से पहले रिंकू को अपने यहां काम से क्यों नहीं निकाला ?