रायपुर

पैसा लिया बड़ी किताबों को छापने का पर प्रिंटरों को लाभ पहुंचाने छापी छोटी

पुस्तकों की छपाई ए-4 साइज में करना था, लेकिन प्रिंटरों ने मनमानी करते हुए साइज में 12.25 प्रतिशत की कटौती कर दी

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Oct 28, 2018
पैसा लिया बड़ी किताबों को छापने का पर प्रिंटरों को लाभ पहुंचाने छापी छोटी

जितेंद्र दहिया@रायपुर. साल 2016-17 में छत्तीसगढ़ में राज्य ओपन स्कूल की किताबों की छपाई छह प्रिंटरों से कराई गई, जिसमें वर्कऑर्डर में निर्धारित गुणवत्ता के विपरीत प्रिंटिंग की गई थी। इसका खुलासा मुंबई राइट्स लिमिटेड लैब की जांच रिपोर्ट में हुआ था।

पुस्तकों की छपाई ए-4 साइज में करना था, लेकिन प्रिंटरों ने मनमानी करते हुए साइज में 12.25 प्रतिशत की कटौती कर दी। आरटीआइ कार्यकर्ता शेष नारायण शर्मा द्वारा शिकायत करने पर अधिकारियों ने मामले की जांच तो की, लेकिन प्रिंटरों को लाभ पहुंचाने के लिए गलत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। जांच रिपोर्ट में पुस्तकों की साइज सिर्फ 6 प्रतिशत छोटा बताया गया है।

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जबकि, असल में 12.25 प्रतिशत तक छोटी पुस्तकें छापकर शासन को 1 करोड 5 लाख का नुकसान पहुंचाया गया। अधिकारियों ने नुकसान को कम बताते हुए सिर्फ 16 लाख ही दर्शाया है। रिकवरी प्रिंटरों से कर ली गई है। इस तरह तकरीबन 1 करोड़ 5 लाख 86 हजार 191 रुपए के नुकसान की अब भी भरपाई नहीं की गई है।

खुद मानी थी पांच प्रतिशत की कटौती : जांच में अधिकारियों ने माना था कि 5 से 6 प्रतिशत छोटी साइज में पुस्तकों की सप्लाइ किए जाने के कारण मुद्रकों को किए जाने वाले भुगतान में कटौती किए जाने की संबंध में 26 जून 2017 को बैठक बुलाई गई। इसमें मुद्रकों को किए जाने वाले भुगतान में 5 प्रतिशत की कटौती करने का विचार किया गया। जो छपाई की कुछ राशि 8 करोड़ 64 लाख 17 हजार 883 रुपए का लगभग 43 लाख 20 हजार 894 रुपए होता है। परंतु फर्मो से हुए पत्राचार में उनकी अध्ययन सामग्री मुद्रण की दर गणना के समय में बाइंडिंग की दर गणना किए गए दर में शामिल नहीं किया गया है।

8 करोड़ की प्रिंटिंग : मुद्रकों के जवाब पर जांच समिति ने 1 प्रतिशत दंड राशि जमा करने की अनुशंसा की थी। संवाद की सीइओ ने 2 प्रतिशत करके 8 करोड़ 64 लाख 17 हजार 883 रुपए का 2 प्रतिशत 16 लाख रुपए सभी प्रिंटरों से वसूली करने का निर्देश दिया था। जबकि 12.25 प्रतिशत की दर से दंड राशि कुल 1 करोड़ होनी चाहिए थी। इस तरह कुल 1 करोड़ से ज्यादा की चपत शासन को लगी है।

प्रिंटरों के अनोखे तर्क, संवाद ने दी स्वीकृति
शिकायत के बाद संवाद द्वारा सभी प्रिंटर्स को नोटिस भेज कर प्रिंटिंग मंे हुई कटौती के संबंध में तलब किया। जिस पर सभी प्रिंटर्स ने अनोखा जवाब दिया है। प्रिंटर्स का कहना है कि संवाद द्वारा ओपन स्कूल की किताबों की छपाई के लिए दिए गए वर्कआर्डर में बाइंडिंग की दर शामिल नहीं है। जबकि वर्कआर्डर में साफ लिखा है कि पुस्तकों की प्रिटिंग की जानी है। अब सवाल यह है कि एेसी कौन पुस्तक होती है जो बिना वाइंडिंग के तैयार की जाती है।

इन प्रिंटर्स से हुई नाममात्र की रिकवरी
अशीष स्टेशनरी मार्ट
कयूमी प्रिंटर्स
स्वास्तिकी प्रिंटर्स
सागर प्रिंटर्स
महावीर प्रिंटर्स
श्रीराम प्रिंटर्स

जांच की खानापूर्ति
शिकायत के बाद अधिकारियों ने छापी गई किताबों की जांच एमएसएमइ टेस्टिंग स्टेशन हैदराबाद की एक निजी लैब में कराई। जबकि पहले ही मुबंई स्थित राइट्स लिमिटेड की लैब भारत सरकार का उपक्रम है। अधिकारियों ने इस लैब की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए, खुद निजी लैब की रिपोर्ट को मान्य किया।

संवाद के सीइओ राजेश सुकुमार टोप्पो ने बताया कि शिकायत के बाद हमने खुद लैब में जांच कराई थी। लैब रिपोर्ट के आधार पर प्रिंटर्स से रिकवरी की गई है।

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Published on:
28 Oct 2018 09:41 am
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