रायपुर

पत्रिका जन अभियान: निजी बसों में सुविधा जीरो, किराया पूरा, 15 बसों की पड़ताल में सामने आई बदहाल तस्वीर

Chhattisgarh Bus Service: राज्य की सड़कों पर दौड़ रही कई निजी यात्री बसों में यात्रियों से किराया तो पूरा वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा और सुरक्षा के नाम पर बदहाली नजर आ रही है। पत्रिका जन अभियान की 15 बसों की पड़ताल में कई खामियां सामने आईं।
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Oct 02, 2026
Passenger Bus Facilities
खटारा निजी बसों में यात्रियों को सुविधा जीरो (फोटो सोर्स- grok)

Private Bus Condition: राज्य की सड़कों पर दौड़ रही कई यात्री बसों में यात्रियों से किराया तो पूरा वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। इन बसों में सफर करना यात्रियों के लिए परेशानी और जोखिम से कम नहीं है। कहीं सीटों के कवर फटे हैं तो कहीं लोहे की स्प्रिंग बाहर निकली हुई है। गर्मी में पसीने से यात्री बेहाल होते हैं तो बारिश में बसों की छत से पानी टपकता है। सुरक्षा के इंतजाम भी कई बसों में नदारद हैं। पंचर होने की स्थिति में अधिकांश बसों में स्पेयर टायर तक उपलब्ध नहीं है। रायपुर से लेकर बस्तर, सरगुजा और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक निजी बसों की यही स्थिति देखने को मिल रही है।

सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण लोग मजबूरी में इन बसों से सफर कर रहे हैं। खासकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में यात्रियों के पास दूसरा विकल्प नहीं होने का फायदा निजी बस ऑपरेटर उठा रहे हैं। रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड सहित बिलासपुर, जगदलपुर, देवभोग, महासमुंद, बलौदाबाजार और अंबिकापुर रूट पर चलने वाली 15 बसों का जायजा लिया गया।

ज्यादातर बसों में सीटों के कवर फटे मिले। कई सीटों से जूट और लोहे की स्प्रिंग बाहर निकली हुई थी। खिड़कियों के शीशे टूटे थे और उनकी जगह पॉलीथिन या टीन की चादर लगाई गई थी। कई बसों के इमरजेंसी गेट जाम मिले और कुछ में ताले तक लगे थे।बसों में पीने के पानी, फर्स्ट एड बॉक्स और आग बुझाने वाले यंत्र की व्यवस्था भी नहीं मिली। कुछ बसों पर एसी होने के स्टिकर तो लगे थे, लेकिन यात्रियों को एसी की सुविधा नहीं मिल रही थी।

ग्रामीण और वनांचल में हालात ज्यादा खराब

रायपुर से भिलाई-दुर्ग और धमतरी के बीच चलने वाली कुछ बसों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं। बस्तर के अंदरूनी इलाकों सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के साथ सरगुजा के लुंड्रा और बलरामपुर जैसे क्षेत्रों में सीमित संख्या में बसें चलती हैं। कई मार्गों पर एक ही बस पूरे क्षेत्र के लिए लाइफलाइन बनी हुई है। बसों की संख्या कम होने के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। रात 8 बजे के बाद कई मार्गों पर आवागमन का साधन नहीं होने से यात्रियों की मजबूरी का फायदा ऑपरेटरों द्वारा उठाए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।

बस नहीं तो ट्रैक्टर-मालवाहक का सहारा

ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री बसों का नियमित संचालन नहीं होने के कारण लोग ट्रैक्टर और मालवाहक वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। प्रतिबंध के बावजूद कई गांवों में इन वाहनों का उपयोग यात्रियों को ढोने में किया जाता है। रात में आपात स्थिति होने पर लोग चेतावनी के बावजूद मालवाहक वाहनों में सफर करने को मजबूर होते हैं।

न तय स्टॉपेज, न टाइम-टेबल

कई निजी बसों का न तो निर्धारित टाइम-टेबल है और न ही तय स्टॉपेज। बसें कई बार सवारी पूरी होने के बाद ही बस स्टैंड से रवाना होती हैं। यात्रियों को दो-दो घंटे तक बस भरने का इंतजार करना पड़ता है। रास्ते में भी सवारी देखकर चालक जहां मर्जी बस रोक देते हैं। वहीं देर रात कई बसें निर्धारित स्टॉपेज पर नहीं रुकतीं। सबसे बड़ी समस्या तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग को लेकर है। यात्रियों का आरोप है कि समय पर पहुंचने और ज्यादा फेरे लगाने के दबाव में चालक तेज गति से बस चलाते हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में निजी बसों से जुड़े 140 से अधिक सड़क हादसे हुए, जिनमें 60 से ज्यादा लोगों की मौत और 90 से अधिक लोग घायल हुए।

सवारी बैठाने को लेकर आए दिन विवाद

सवारी बैठाने को लेकर बस स्टैंड से लेकर सड़क तक विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसका सीधा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। परिवार और विशेषकर महिलाओं के साथ सफर करने वाले यात्रियों को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। विरोध करने पर दुर्व्यवहार करने या रास्ते में उतार देने की शिकायतें भी सामने आती हैं।

Updated on:
02 Oct 2026 09:15 am
Published on:
02 Oct 2026 09:15 am