Pt. Ravishankar Shukla University : प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब एडमिशन के लिए शपथ पत्र देना होगा।
Pt. Ravishankar Shukla University : प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब एडमिशन के लिए शपथ पत्र देना होगा। स्टूडेंट्स को लिखकर देना होगा कि वे तंबाकू, सिगरेट, शराब समेत किसी भी तरह का नशा नहीं करेंगे। शपथ पत्र देने के बाद ही स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में एडमिशन मिलेगा। इसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
दरअसल, यूजीसी नई दिल्ली ने पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी समेत देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत एक गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक, विश्वविद्यालयों में तंबाकू, शराब और नशीली दवाइयों जैसी लत को रोकने के लिए छात्र-छात्राओं को एडमिशन के समय नशा नहीं करने का शपथ पत्र भी देना पड़ेगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। शपथ पत्र हस्ताक्षर करने के साथ ही विद्यार्थियों पर न केवल संस्थानों, बल्कि मां-बाप की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी होगी।
बंदिशों से बदलाव की तैयारी; वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं...
1. संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई
अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर में नशीली दवाओं के सेवन को रोकने जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशाला और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए सूचना देनी होगी। उपचार, पुनर्वास के पहलुओं पर भी फोकस रहेगा।
2. रैगिंग रोकने क्लब बनाने की सलाह
यूजीसी ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों को मादक पदार्थ मुक्त वातावरण बनाने के साथ ही रैगिंग की रोकथाम और सुरक्षा उपायों का पालन करवाने के लिए सामान्य क्लब बनाने की सलाह दी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में मौजूदा स्थिति में तकरीबन 16 सरकारी विश्वविद्यालय संचालित हैं। इसमें रविवि समेत कृषि, उद्यानिकी, तकनीकी और आयुष भी शामिल है। इनके अलावा 13 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं।
3. कवायद के पीछे ये रही बड़ी वजह
करीब 5 साल पहले हुए सर्वे के मुताबिक, देश में करीब 16 करोड़ लोग शराब पीने वाले हैं। इनकी उम्र 10 से 75 साल के बीच है। इनमें से 19 फीसदी लोग शराब की गंभीर लत से जूझ रहे हैं। शराब और ड्रग्स के अलावा भी करीब 4.6 लाख बच्चे और 18 लाख वयस्क सर्दी-जुकाम में दवा के तौर पर नशीली दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। शराब पीने में सबसे खराब हालत छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, त्रिपुरा और पंजाब की है।
यूजीसी के निर्देशों के मुताबिक नशा मुक्त भारत बनाने के लिए विश्वविद्यालय में पहले ही विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रहीं हैं। एनएसएस वाले लगातार युवाओं को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। हाल ही में जो एडवाइजरी जारी की गई है, उस मुताबिक भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
- डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय