
करोड़ों के घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई (photo source- Patrika)
Officers Suspended: नगर निगम में सामने आए 100 करोड़ से अधिक के कथित भ्रष्टाचार मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस पूरे प्रकरण में अब बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम आयुक्त ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें गंभीर अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी सामने आई है।
नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने जानकारी देते हुए बताया कि जोन क्रमांक 10 से जुड़े मामले में तत्कालीन जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। साथ ही वेतन वृद्धि पर रोक और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
जांच में सामने आया है कि करीब 150 से 159 एकड़ अवैध जमीन को नियमों के खिलाफ जाकर वैध करने की कोशिश की गई। इस पूरी प्रक्रिया में नगर निगम मुख्यालय को दरकिनार किया गया। संरचना अनुमति और TNC (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) अप्रूवल में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि कई बार मूल दस्तावेज (नस्ती) मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए। 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलें गायब बताई जा रही हैं। यह अपने आप में पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। बिल्डरों, दलालों और अधिकारियों के बीच गठजोड़ की संभावना जताई गई है। यह पूरा मामला बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर जैसे इलाकों से जुड़ा है। यहां के भूखंडों को नियमों के विपरीत जाकर वैध बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई। 70 से अधिक खसरा नंबर इस घोटाले के दायरे में बताए जा रहे हैं
नियम के मुताबिक फाइल पहले जोन से निगम मुख्यालय, फिर कमिश्नर और उसके बाद TNC विभाग जाती है। लेकिन इस मामले में— फाइल सीधे जोन से TNC भेज दी गई। कमिश्नर की मंजूरी को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। बाद में जब फाइल कमिश्नर के पास आई, तो उन्होंने खुद हैरानी जताई।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस मामले को बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि यह 100 करोड़ से ज्यादा का खेल है। अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के लिए पूरा षड्यंत्र रचा गया। मामला सामने आते ही मूल दस्तावेज गायब कर दिए गए। चार सदस्यीय जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता पंकज शर्मा ने की, ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब आगे विभागीय और कानूनी कार्रवाई के साथ पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
Updated on:
18 Apr 2026, 5:25 PM IST
Published on:
18 Apr 2026, 5:25 PM IST
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