
Chhattisgarh Education Department(photo-patrika)
Chhattisgarh Education Department: छत्तीसगढ़ में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद नई पदस्थापना वाले विद्यालयों में समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने ऐसे 273 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने पर 5 संभागीय संयुक्त संचालकों (जेडी) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने अधिकारियों से तीन दिन में कार्रवाई प्रतिवेदन और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संचालनालय ने कहा है कि कई बार निर्देश देने के बावजूद अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों ने संचालनालय को तथ्यात्मक जानकारी और आवश्यक दस्तावेज भी नहीं भेजे। इसे अधिकारियों की जिम्मेदारियों के निर्वहन में शिथिलता माना गया है। विभाग ने पूछा है कि इस लापरवाही के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
डीपीआई ने निर्देश दिया है कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों और व्याख्याताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर भेजी जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर मामला शासन को भेजा जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
युक्तियुक्तकरण के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों ने नई पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 273 से अधिक शिक्षक और अधिकारी अब तक जॉइन नहीं हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 134 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 71 व्याख्याता, 42 शिक्षक (वर्ग-2), 15 प्रधान पाठक और एक प्राचार्य ने भी नए स्कूलों में पदभार नहीं संभाला है। विभाग का मानना है कि इससे युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों को झटका लग रहा है।
राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया है। इस प्रक्रिया में 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया गया है। विभाग का कहना है कि पदस्थापना के बाद भी शिक्षकों का कार्यभार ग्रहण नहीं करना युक्तियुक्तकरण के उद्देश्य को प्रभावित कर रहा है और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, उनसे जवाब मांगा गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
6 Jun 2026, 11:19 AM IST
Published on:
6 Jun 2026, 11:19 AM IST
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