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CG Dhan Kharidi: धान खरीदी में 2.54 करोड़ का घोटाला! रिकॉर्ड और स्टॉक में भारी अंतर, प्रभारी फरार

CG Dhan Kharidi: धान खरीदी केंद्र में 2.54 करोड़ रुपये के धान गबन का मामला सामने आया है। प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी है, जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।

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धान खरीदी में 2.54 करोड़ का घोटाला (photo source- Patrika)

धान खरीदी में 2.54 करोड़ का घोटाला (photo source- Patrika)

CG Dhan Kharidi: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में धान खरीदी व्यवस्था में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है, जिसने सहकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हथनीकला धान खरीदी केंद्र में पदस्थ प्रभारी विक्रम सिंह राजपूत पर करीब 2.54 करोड़ रुपये के धान गबन का आरोप लगा है। मामले में सिटी कोतवाली थाना में FIR दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है।

CG Dhan Kharidi: पर्यवेक्षक की शिकायत से खुला मामला

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा मुंगेली में पदस्थ पर्यवेक्षक भरत लाल कौशिक ने इस घोटाले की शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, आरोपी ने 8216.30 क्विंटल धान में हेराफेरी कर अमानत में खयानत की, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ 54 लाख 70 हजार रुपये आंकी गई है।

कलेक्टर के निर्देश पर बनी जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने 30 मार्च 2026 को एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया। इस टीम में राजस्व, सहकारिता, खाद्य और मंडी विभाग के अधिकारी शामिल थे। जांच टीम ने 8 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

भौतिक जांच में सामने आई भारी कमी

जांच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया। रिकॉर्ड में जहां करीब 9798 क्विंटल धान दर्ज था, वहीं मौके पर केवल 7534 क्विंटल ही मिला। इसके अलावा वजन में भी कमी पाई गई। कुल मिलाकर 8216 क्विंटल से ज्यादा धान का हिसाब नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि धान की किस्म के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। ऑनलाइन डेटा और मौके पर उपलब्ध धान के प्रकार में भारी विसंगति पाई गई, जिससे रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका और मजबूत हो गई है।

CG Dhan Kharidi: नियमों की अनदेखी और सिस्टम से छेड़छाड़

जांच के दौरान कई अनियमितताएं उजागर हुईं। बिना अधिकृत कर्मचारियों की मौजूदगी के डेटा एंट्री और धान की लोडिंग की गई। साथ ही आरोपी और उसके परिजनों द्वारा कार्य संचालन में हस्तक्षेप के संकेत भी मिले हैं। जांच के दौरान आरोपी कई दिनों से अनुपस्थित पाया गया और उसका मोबाइल भी बंद मिला। नोटिस देने के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर 13 अप्रैल 2026 को सिटी कोतवाली थाना में मामला दर्ज किया गया। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरी खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे घोटालों पर लगाम लग पाएगी।