रायपुर

Chhattisgarh PWD Scam: PWD के 13 करोड़ के टेंडर पर अरुण साव का बयान, बोले- अनियमितता साबित हुई तो होगी कार्रवाई

PWD Tender Scam Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ PWD की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा पर ब्लैकलिस्ट कंपनी को करोड़ों के ठेके देने के आरोप। फर्जी शपथपत्र के जरिए मिला काम, डिप्टी सीएम अरुण साव ने जांच के बाद कार्रवाई के दिए संकेत।

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Jun 13, 2026
Chhattisgarh PWD Scam
PWD की टेंडर प्रक्रिया पर बड़े सवाल (photo source- Patrika)

Chhattisgarh PWD: छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा में करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एक कंपनी को करीब 13 करोड़ रुपये के ठेके दिए जाने के आरोपों के बीच उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा है कि यदि मामले में कोई शिकायत प्राप्त होती है या जांच में अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस पूरे मामले ने विभाग की टेंडर प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Blacklisted Firm Tender Case: ब्लैकलिस्ट कंपनी को मिले करोड़ों के ठेके

जानकारी के अनुसार रायपुर की मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को PWD द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यों के ठेके आवंटित किए गए। जबकि दस्तावेज बताते हैं कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने वर्ष 2023 में कंपनी की निविदा सुरक्षा राशि (EMD) जब्त करते हुए उसे पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया था। इसके बावजूद कंपनी को सरकारी कार्य दिए जाने से पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है।

झूठे शपथपत्र के आधार पर हासिल किया टेंडर?

दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें दावा किया गया कि फर्म किसी भी सरकारी विभाग में ब्लैकलिस्ट या प्रतिबंधित नहीं है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने इस दावे की स्वतंत्र जांच किए बिना ही दस्तावेजों को स्वीकार कर लिया और कंपनी को पात्र मानते हुए टेंडर दे दिए।

सूत्रों के अनुसार, ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को बिलासपुर खेल परिसर और विद्युत नवीनीकरण जैसे कार्यों के लिए लगभग 4.87 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। अन्य परियोजनाओं को मिलाकर कंपनी को करीब 13 करोड़ रुपये के ठेके दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

PWD Contractor Scam: डिप्टी सीएम अरुण साव बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है और एजेंसियों द्वारा पोर्टल पर जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर पात्रता तय की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है या जांच में अनियमितता सामने आती है, तो शासन स्तर पर गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्मार्ट सिटी ने पहले ही कर दी थी कार्रवाई

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने कंपनी के खिलाफ पूर्व में कड़ी कार्रवाई की थी। आरोप था कि एजेंसी ने सरकारी भवनों में लाइटिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरती थी तथा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया था। इसके बाद कंपनी की EMD जब्त कर उसे पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।

दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी टेंडर को अंतिम स्वीकृति देने से पहले एजेंसी की पात्रता, पूर्व रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। लेकिन इस मामले में ब्लैकलिस्टेड फर्म के दावों को बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन के स्वीकार कर लिया गया। इससे विभाग की दस्तावेज जांच प्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Chhattisgarh Tender Controversy: अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सरकारी ठेके दिए गए हैं, तो केवल एजेंसी ही नहीं बल्कि टेंडर स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। ऐसे में संभावित जांच में यह भी स्पष्ट हो सकता है कि मामला महज लापरवाही का है या फिर किसी स्तर पर नियमों को दरकिनार कर एजेंसी को लाभ पहुंचाया गया।

फिलहाल पूरे मामले ने PWD की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें संभावित जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि यह प्रशासनिक चूक थी या फिर करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन में किसी बड़े खेल की आशंका है।

Updated on:
13 Jun 2026 04:12 pm
Published on:
13 Jun 2026 03:51 pm