
रायपुर@ हिमांशु शर्मा। Railway Parking Scam: रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए का ठेका दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यहां पार्किंग व्यवस्था में नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। आरपीएफ थाना के साइड में संचालित पार्किंग ठेकेदार के खिलाफ पहले भी वसूली, अनियमितताओं और विवादों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस पर रेलवे सिर्फ फाइन लगाकर भूल जाता है। अब उसे दोबारा पार्किंग संचालन की जिम्मेदारी सौंप दी गई। जानकारी के अनुसार, एक ठेकेदार के छोड़ने के बाद टेंडर के जरिए 1 करोड़ 21 लाख प्लस जीएसटी के साथ ठेका दिया गया है।
स्टेशन पर तीन-अलग-अलग पार्किंग संचालित हो रही हैं, इसमें एक गुढि़यारी के तरफ संचालित है, जिसके ऑनर सुभाष अग्रवाल हैं। इन्होंने ही आरपीएफ थाना की ओर संचालित और पार्सल ऑफिस के पीछे रेलवे कर्मचारियों के आरक्षित पार्किंग है। पार्किंग परिसर में वाहन चालकों से शुल्क वसूलने वाले कर्मचारियों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि कर्मचारी बिना वर्दी और पहचान पत्र के ही वसूली करते नजर आते हैं।
सबसे गंभीर सवाल वाहनों की सुरक्षा को लेकर है। अव्यवस्थित आवागमन और अग्निशमन इंतजामों की कथित कमी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। आग लगने जैसी आपात स्थिति में यात्रियों और उनके वाहनों की सुरक्षा कैसे होगी? क्योंकि कुछ साल पहले ही पुराने पार्सल ऑफिस के पीछे पार्किंग के पास आग लगी थी, जिसमें आधा दर्जन से अधिक गाड़ी चपेट में आई थी।
तीनों पार्किंग में अव्यवस्था का आलम है। गुढियारी की ओर पार्किंग में पीछे की ओर टीन शेड मुड़ा हुआ है, जिससे चोरी की आशंका बनी रहती है। अग्निशमन भी नजर नहीं आया है। यही स्थिति आरपीएफ थाना पास संचालित पार्किंग में रही और पार्सल ऑफिस के पीछे पार्किंग में भी है।
पत्रिका ने हफ्तेभर तक इन पार्किंग में जाकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो, सामने आया कि पार्किंग ठेकेदार सभी फोर व्हीलर-टू व्हीलर गाड़ी को ठूंस-ठूंस के रखा है। जिससे यात्रियों को वापस लौटना पड़ा रहा है। जबकि टू व्हीलर और फोर व्हीलर की पार्किंग अलग-अलग है।
आएदिन रायपुर स्टेशन में मंडल से लेकर जोन तक के कार्यालयों से एसीएम, सीनियर डीसीएम, डीआरएम और जीएम तक निरीक्षण करने पहुंचते हैं। उसके बावजूद इन्हें अबतक पार्किंग की अव्यवस्था नहीं दिखी। हर दिन रायपुर स्टेशन में 80 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन है। त्योहार के समय यह भीड़ एक लाख पार हो जाती है।
डॉ. सुष्कर विपुल विलासराव, रायपुर मंडल के मुताबिक, बिना वर्दी और आईकार्ड के कर्मचारी काम कर रहे हैं, तो इसकी जांच की जाएगी। पार्किंग का ठेका टेंडर के अनुसार हुआ है। पहले शिकायत या फाइन है और यदि वो ब्लैक लिस्ट नहीं है तो टेंडर में शामिल हो सकता है। सुरक्षा के लिए पार्किंग में कर्मचारी होते हैं।