
ग्रीन पटाखों का बढ़ा क्रेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)
रायपुर @अजय रघुवंशी। Diwali Crackers Business: इस दीवाली ग्रीन पटाखों की वैरायटी का दबदबा है। आप जो पटाखे खरीद रहे हैं वह ग्रीन पटाखें है या सामान्य। इसकी जांच के लिए ग्रीन पटाखों का लोगो और क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकता है। कारोबारियों के मुताबिक बाजार में बिकने वाले करीब 95 फीसदी पटाखे ग्रीन श्रेणी के आ रहे हैं। पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 से 50 फीसदी तक कम प्रदूषण फैलाने के दावे के बीच ग्राहकों में इनकी मांग बढ़ी है।
प्रदेश में सिर्फ दिवाली के दौरान पटाखों का कारोबार करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। रायपुर सहित दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा और राजनांदगांव जैसे प्रमुख शहरों में भी ग्रीन पटाखों की बिक्री का जोर है। प्रदेशभर में 5000 से अधिक छोटी-बड़ी पटाखा दुकानें संचालित है। दिवाली के आसपास इन दुकानों पर सबसे ज्यादा कारोबार होता है। इस बार बाजार में अनार, फुलझड़ी, चकरी, रॉकेट और अलग-अलग तरह के आतिशबाजी उत्पादों की ग्रीन वैरायटी उपलब्ध है।
ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों का ऐसा विकल्प हैं, जिनमें रासायनिक तत्वों और कच्चे माल की मात्रा में बदलाव करके प्रदूषण कम करने की तकनीक अपनाई जाती है। इन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने विकसित किया है। इन पटाखों में पारंपरिक पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में घुलने वाले धूल के बारीक कणों का उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जाता है।
सन्नी संतवानी, पटाखा कारोबारी, लाखेनगर बाजार, रायपुर के मुताबिक, अब बाजार में 95 फीसदी कंपनियां ग्रीन पटाखे का लोगो और स्कैनर लगा रही है, जिसमें लाइसेंस और कंपनियों की अन्य जानकारियां होती है। ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम होता है। प्रदेश में दीवाली में पटाखों का व्यवसाय 100 करोड़ पार होने की संभावना है।
Updated on:
4 Nov 2026, 2:21 PM IST
Published on:
4 Nov 2026, 2:21 PM IST
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