
Chhattisgarh Electric Bus: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंगलवार को केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के निदेशक भानु प्रताप सिंह भदौरिया के साथ नगरीय प्रशासन एवं सूडा के अधिकारियों की बैठक लेकर प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में ई-बस सेवा की संचालन व्यवस्था, विस्तार, रूट प्लानिंग, बस स्टॉप, डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बता दें कि भारत सरकार की प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार नगर निगमों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
सोनमणि बोरा और भदौरिया ने कहा, ई-बस सेवा के रूट का निर्धारण शहरों की वास्तविक परिवहन आवश्यकताओं और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, प्रमुख बाजारों, महत्वपूर्ण संस्थानों एवं अन्य जनोपयोगी स्थानों को ई-बस नेटवर्क से जोड़ने वाले रूट तैयार करने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
शहरी कार्य मंत्रालय के निदेशक भदौरिया ने डिपो, चार्जिंग स्टेशन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए स्थान चयन तथा भूमि संबंधी विषयों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा के सीईओ सुमीत अग्रवाल, सीएसपीडीसीएल के प्रबंध संचालक भीम सिंह कंवर और नगर निगमों के आयुक्त मौजूद थे।
ई-बस सेवा शुरू करने के लिए केवल बसें उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। इनके संचालन के लिए शहरों में पर्याप्त संख्या में बस स्टॉप, डिपो और चार्जिंग स्टेशन तैयार करना भी जरूरी होगा। बैठक में इन सुविधाओं के लिए उपयुक्त स्थानों के चयन पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के निदेशक भानु प्रताप सिंह भदौरिया ने डिपो, चार्जिंग स्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए भूमि की उपलब्धता तथा स्थान चयन से जुड़े विषयों को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
ई-बस नेटवर्क में ऐसे क्षेत्रों को जोड़ने पर जोर दिया गया जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। इसके लिए स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार, महत्वपूर्ण सरकारी एवं निजी संस्थान और अन्य जनोपयोगी स्थानों को ध्यान में रखकर रूट तैयार करने की बात कही गई। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और आम नागरिकों को शहर के विभिन्न हिस्सों तक आने-जाने में सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प मिल सकेगा।