
Chhattisgarh News: मध्यप्रदेश के विधायक संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़े कारोबारी समूह में करीब 1000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच तेज हो गई है। मुख्य आरोपी महेंद्र गोयनका को कोलकाता की हरे स्ट्रीट थाना पुलिस 10 दिन की रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है। पुलिस अब कंपनी प्रबंधन,शेयरहोल्डिंग में कथित बदलाव, दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और वित्तीय हेरफेर से जुड़े राज उगलवाने में जुटी है।
इस मामले में कटनी के कोतवाली और माधवनगर थाने सहित कोलकाता में भी एफआईआर दर्ज हैं। शिकायत के मुताबिक, महेंद्र गोयनका की शुरुआत संजय पाठक के समूह में मिनरल ट्रेडिंग के जरिए हुई थी। पहले वह महज 5 से 10 रुपए प्रति टन कमीशन पर काम करता था। धीरे-धीरे भरोसा जीतकर वह उत्पादन, मार्केटिंग, फाइनेंस और अंततः कंपनी का सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बन गया। आरोप है कि पद पर आते ही उसने अपने विश्वासपात्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की नियुक्ति कराई, जिन्होंने बाद में महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संभाला।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2017-18 के दौरान कंपनियों के विलय और शेयरहोल्डिंग में बदलाव का फायदा उठाकर बड़ा खेल खेला गया। वास्तविक शेयरधारकों की जगह आरोपी ने अपने परिजनों के नाम दर्ज करा दिए। निदेशकों के कथित फर्जी इस्तीफे और नकली हस्ताक्षरों के जरिए शेयर ट्रांसफर के दस्तावेज तैयार किए गए। दस्तावेजों में हेरफेर कर कंपनी के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण पर कब्जा कर लिया गया। कंपनी की जमीन, प्लांट, बैंक जमा और एफडी का कथित दुरुपयोग कर बड़ी मात्रा में 'मनी सिफनिंग' (धन की हेराफेरी) की गई।
कोलकाता पुलिस मुख्य रूप से इस बात की जांच कर रही है कि शेयर ट्रांसफर और निदेशकों के बदलने की प्रक्रिया किसके इशारे पर हुई? फर्जी हस्ताक्षरों की क्या भूमिका थी और बैंक खातों से हुए लेनदेन का नेटवर्क कहां तक फैला है? हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। पूरा मामला एनसीएलटी सहित अन्य न्यायिक मंचों पर भी लंबित है।
आरोपी कारोबारी महेंद्र पूर्व में यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया निजी लिमिटेड में एक प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्यरत थे। उस पर करीब 1 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी के माल को छल-कपट से बेचने का आरोप है। साथ ही फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से अपने परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने का भी आरोप है। एमपी के अलावा कोलकाता में भी भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी मामले में यह गिरफ्तारी हुई है।
कटनी, मध्यप्रदेश में भी गोयनका और अन्य डॉयरेक्टरों के खिलाफ दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं। जानकारी के अनुसार, उनके सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी थीं, जिसके बाद से फरार थे। मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा वित्तीय गबन से संबंधित टिप्पणियां दर्ज हैं। उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है। इस गिरफ्तारी से मध्यप्रदेश के कई अधिकारियों और व्यापारियों के राज खुलने की संभावना है।