CG Water Crisis: पिछले 15-20 वर्षों से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के दम पर भूजल स्तर को स्थिर बनाए हुए हैं। राजधानी के करीब 3.50 लाख घरों में से 20 प्रतिशत में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है।
CG Water Crisis: @अजय रघुवंशी। प्रदेश की राजधानी इस समय भीषण जल संकट की चपेट में है। शहर के 70 वार्डों में से 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में बोरवेल दम तोड़ चुके हैं। जहां एक ओर पानी के लिए कोहराम मचा है, वहीं दूसरी ओर कुछ जागरूक परिवार पिछले 15-20 वर्षों से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के दम पर भूजल स्तर को स्थिर बनाए हुए हैं। राजधानी के करीब 3.50 लाख घरों में से 20 प्रतिशत में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है।
आंकड़ों के मुताबिक, हर मानसून में छतों से करीब 22 लाख लीटर पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। यदि सरकारी और निजी भवनों को मिला दिया जाए, तो यह आंकड़ा 50 अरब लीटर तक पहुंच जाता है। जागरूकता की कमी का नतीजा यह है कि रायपुर में भूजल स्तर 200 से 800 फीट तक नीचे गिर गया है। जब तक राजधानी का हर घर 'वॉटर हार्वेस्टिंग' को जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक सरकारी योजनाएं और राजसात की गई राशि प्यास बुझाने में नाकाम ही रहेगी।
1500 वर्गफीट से बड़े घरों के लिए हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है। नक्शा पास कराते समय लोगों ने नगर निगम में एफडीआर के रूप में राशि जमा की, लेकिन सिस्टम नहीं लगाया। निगम ने ऐसी 17 करोड़ रुपए की राशि राजसात कर ली है। तय हुआ था कि निगम स्वयं इन घरों में सिस्टम लगाएगा, लेकिन यह प्रक्रिया पिछले तीन साल से कागजों में ही अटकी हुई है।
फायदे चौकाने वालेभू-जल वैज्ञानिक डॉ. विपिन दुबे के अनुसार, वॉटर हार्वेस्टिंग के फायदे चौंकाने वाले हैं।1500 वर्गफीट का घर सालाना 1.34 लाख लीटर पानी का संचय कर सकता है। 1000 वर्गफीट का घर से सालाना 80 हजार लीटर पानी की बचत हो सकती है।
क्रिटिकल ज़ोन: रायपुर, धमतरी, बालोद, बेमेतरा।
सेमी-क्रिटिकल ज़ोन: दुर्ग, बस्तर, कोरबा, राजनांदगांव समेत 14 जिले।
पाताल में पानी: दलदल सिवनी, सड्डू, मोवा, पंडरी, सिविल लाइन, कटोरा तालाब, खमतराई, भनपुरी और राजेंद्र नगर जैसे क्षेत्रों में जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है।
यह घर बने उदाहरण
केस स्टडी-1
कमासीपारा निवासी पेशे से बिजनेसमैन भागचंद झाबक ने 2010 में वर्षा जल के संरक्षण के लिए घर पर सिस्टम लगाया। आज तक उनके घर में बोर सूखने की समस्या नहीं आई, जबकि मोहल्ले के कई घरों में पानी पाताल में जा चुका है।
केस स्टडी-2
ब्राम्हण पारी निवासी व विप्र कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मेघेश तिवारी ने बताया कि 2009 में फिल्टर युक्त रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया। तब से लेकर आज तक पानी की परेशानी नहीं हुई है।
केस स्टडी-3
स्टेट बैंक कॉलोनी, सुंदर नगर निवासी अधिवक्ता अनुराग शर्मा ने बताया कि 2005 में मैंने सिस्टम लगाया। अभी 200 फीट में ही पानी है। मैंने नए व पुराने दोनों मकान में यह सिस्टम लगाया है।
वर्जन…
जिन घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है, वहां जोन वार अभियान चलाया जाएगा। कुछ जोन में टेंडर जारी किए गए हैं। आम लोगों से अपील है कि वे नगर-निवेश के नियमों का पालन करते हुए सिस्टम लगाएं।
मीनल चौबे
महापौर, नगर-निगम रायपुर