रायपुर

Patrika Investigation: थ्री स्टार होटल से भी महंगा रायपुर के निजी अस्पतालों में कमरे का किराया, पत्रिका का बड़ा खुलासा

Patrika Investigation: निजी अस्पतालों में कमरे का किराया किसी थ्री स्टार होटल से अधिक नहीं होना चाहिए। रायपुर के थ्री स्टार होटलों में एक दिन के कमरे का किराया 1500 से 10 हजार रुपए के बीच है।
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Sep 08, 2026
Patrika Investigation
अस्पतालों की मनमानी से मध्यमवर्गीय परिवारों पर मंडराया आर्थिक संकट (Photo Patrika)

Patrika Exclusive Investigation: @पीलूराम साहू। रायपुर के कुछ बड़े निजी अस्पतालों में एक दिन के कमरे का किराया 15 से 20 हजार रुपए तक वसूला जा रहा है। इसमें दवा, इंजेक्शन और जांच का खर्च शामिल नहीं है। गंभीर मरीजों को जीवनरक्षक दवाइयों और कमरे के किराए के रूप में रोजाना एक लाख रुपए या उससे भी ज्यादा चुकाना पड़ रहा है। अस्पताल की यह फीस मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बहुत बड़ा बोझ बन चुकी है। अस्पतालों में किस चीज का कितना शुल्क हो, यह अस्पताल प्रबंधन खुद ही तय करता है। शासन-प्रशासन की इस पर कोई लगाम नहीं है। शिकायत के लिए फोरम तो मौजूद है, लेकिन किराए पर लगाम लगाने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पत्रिका पड़ताल में सामने आई बात

केंद्रीय संसदीय समिति ने यह सिफारिश की थी कि निजी अस्पतालों में कमरे का किराया किसी थ्री स्टार होटल से अधिक नहीं होना चाहिए। रायपुर के थ्री स्टार होटलों में एक दिन के कमरे का किराया 1500 से 10 हजार रुपए के बीच है। रायपुर में एनएबीएच मान्यता प्राप्त 100 से अधिक अस्पताल हैं, जिनमें दो दर्जन से ज्यादा बड़े और मंझोले अस्पताल हैं। 'पत्रिका पड़ताल' में यह बात सामने आई है कि मरीज की बीमारी के हिसाब से रोजाना का कुल खर्च औसतन एक से दो लाख रुपए तक पहुंच जाता है।

अस्पताल में भर्ती होते ही बिल का मीटर चालू

निजी अस्पतालों में मरीज के भर्ती होते ही बिल बनना शुरू हो जाता है। बीमारी के नाम पर कई तरह की जांचें कराई जाती हैं, जिनमें से कई गैर-जरूरी होती हैं। इनमें खून जांच से लेकर सोनोग्राफी और एक्स-रे शामिल हैं। अगर मरीज के पास स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) या आयुष्मान कार्ड है, तो अस्पताल ज्यादा से ज्यादा महंगे पैकेज और जांचें जोड़ने की कोशिश करते हैं।

सुविधा और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर भारी-भरकम बिलिंग

निजी अस्पतालों का तर्क है कि वे अपनी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से फीस ले रहे हैं। सामान्य खून जांच हो या रेडियोलॉजी, अलग-अलग अस्पतालों में इनके दाम अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, शुगर की जांच (एचबीए1सी) के लिए कुछ अस्पताल 1500 रुपए तक ले रहे हैं, जबकि बाहर की लैब में यही जांच 300 से 500 रुपए में हो जाती है।

ज्यादातर अस्पतालों के बोर्ड से शुल्क की जानकारी गायब

स्वास्थ्य विभाग का साफ आदेश है कि अस्पतालों को डॉक्टर की फीस से लेकर जांच के रेट बोर्ड पर लिखने होंगे, लेकिन ज्यादातर अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। मरीजों को असली रेट का पता तब चलता है जब वे बिल काउंटर पर पहुंचते हैं। अचानक इतना भारी बिल देखकर मरीज और उनके परिजन हैरान रह जाते हैं।

आयुष्मान योजना से इलाज में आनाकानी

राजधानी के कुछ बड़े निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से इलाज करने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का तय पैकेज उनकी फीस से मेल नहीं खाता। वहीं, कई अस्पताल पैकेज के बाद भी मरीजों से अलग से कैश मांगते हैं। शिकायत मिलने पर कुछ अस्पतालों पर कार्रवाई तो हुई है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है।

जरूरी जांचों के शुल्क (रुपए में)

एक्स-रे: 300 से 600
सोनोग्राफी: 800 से 1200
सीटी स्कैन: 1500 से 5000
एमआरआई: 2000 से 10000
एचबीए1सी : 500 से 1500
विटामिन डी: 1200 से 2000
विटामिन बी-12: 1300 से 1900

वर्जन

अस्पतालों ने अपनी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से दरें तय की हैं। मरीज जब इलाज कराने आते हैं तो उन्हें शुरुआत में दरों की पूरी जानकारी नहीं होती। आयुष्मान भारत योजना में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कैशलेस हो रहा है। जिन्हें ज्यादा सुविधाएं चाहिए, वे ही प्राइवेट रूम चुनते हैं।

-डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन, बालाजी अस्पताल

कमरों का किराया तय करने के लिए स्पष्ट नियम और कानून बनने चाहिए। संसदीय कमेटी का सुझाव बहुत अच्छा है और अस्पताल भी इसे मानने को तैयार होंगे। मामला सिर्फ कमरे के किराए का नहीं है, पूरी बीमारी के इलाज का खर्च मरीज को उठाना पड़ता है।

-डॉ. सुरेंद्र शुक्ला, प्रदेशाध्यक्ष, आईएमए

अस्पतालों को सभी जांच दरों की जानकारी बोर्ड पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर इसकी जांच और कार्रवाई भी की जाती है। हालांकि कमरों के किराए पर फिलहाल कोई सरकारी नियम नहीं है, फिर भी इसे सामान्य मरीजों की पहुंच में रखने का प्रयास जारी है।

-डॉ. मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ, रायपुर जिला

Updated on:
08 Sept 2026 12:26 pm
Published on:
08 Sept 2026 12:25 pm