
छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत (फोटो सोर्स: Facebook @Sukhdeo Bhagat)
Sukhdeo Bhagat: छत्तीसगढ़ में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कांग्रेस ने अब संगठन के स्तर पर तेज कर दी है। पार्टी हाईकमान ने लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत को प्रदेश कांग्रेस का नया प्रभारी बनाकर एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। आदिवासी समाज से आने वाले भगत के जरिए कांग्रेस बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में संगठन को फिर से मजबूत करने के साथ ही पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को साधने की चुनौती से भी निपटना चाहती है।
नए प्रभारी के सामने सबसे पहली चुनौती प्रदेश कांग्रेस के भीतर अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करने की होगी। पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश शुरू की है। ऐसे में भगत का पहला दौरा महज औपचारिक दौरा नहीं माना जा रहा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वे प्रदेश के नेताओं, पूर्व मंत्रियों, विधायकों, जिला अध्यक्षों और प्रमुख कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर संगठन की वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस के लिए 2028 का चुनाव आदिवासी क्षेत्रों में अपनी खोई हुई राजनीतिक बढ़त हासिल किए बिना आसान नहीं होगा। बस्तर में पिछले चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरण और सरगुजा में भाजपा की मजबूत मौजूदगी ने कांग्रेस की रणनीति को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। ऐसे में झारखंड से आने वाले आदिवासी नेता को प्रभारी बनाना केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति पर फोकस बढ़ाने का संकेत भी माना जा रहा है। भगत स्वयं झारखंड के आदिवासी क्षेत्र लोहरदगा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2019 में वे भाजपा में चले गए थे और बाद में कांग्रेस में लौट आए। 2022 में कांग्रेस में वापसी के बाद पार्टी ने उन्हें फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। 2024 में वे लोहरदगा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
कांग्रेस के ताजा फेरबदल में छह राज्यों के प्रभारियों में बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ में भगत की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी 2028 की चुनावी तैयारी के लिए संगठन को सक्रिय करने की दिशा में बढ़ रही है। प्रदेश कांग्रेस में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि प्रभारी बदलने के बाद संगठन में भी बदलाव हो सकता है। जिलाध्यक्षों से लेकर प्रदेश संगठन के कुछ पदों पर फेरबदल की संभावना को लेकर कांग्रेस के भीतर अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श के बाद ही होगा।
भगत के पहले दौरे को लेकर पार्टी नेताओं की नजर तीन बिंदुओं पर रहेगी। पहला प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी का वास्तविक फीडबैक। दूसरा, बस्तर और सरगुजा में संगठन की जमीनी स्थिति और तीसरा 2028 के लिए नए चेहरों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान। यदि भगत इन तीनों मोर्चों पर संगठन को एक दिशा देने में सफल रहे तो कांग्रेस के लिए यह नियुक्ति 2028 की तैयारी का मजबूत आधार बन सकती है। लेकिन यदि वे भी प्रदेश के मौजूदा शक्ति-संतुलन में उलझ गए तो हाईकमान का यह प्रयोग सवालों के घेरे में आ सकता है।
Updated on:
8 Sep 2026, 11:10 AM IST
Published on:
8 Sep 2026, 11:10 AM IST
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