
Engineering Students Innovation: हाथों के इशारों को समझकर उन्हें आवाज में बदलने वाली तकनीक अब बोलने में असमर्थ लोगों के लिए संवाद का जरिया बन सकती है। रायपुर के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने इसी विचार पर काम करते हुए ‘इलेक्ट्रिकल हैंड’ का प्रोटोटाइप तैयार किया है। टीम का उद्देश्य साइन लैंग्वेज को वॉइस कमांड में बदलना है, ताकि उपयोगकर्ता इशारों के जरिए सामने वाले से आसानी से संवाद कर सके। छात्र टी. प्रशांत के अनुसार, टीम ने ऐसा ग्लव तैयार किया है, जिसमें सेंसर, आर्डिनो सहित कई तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इसे पहनकर यूजर जैसे ही हाथ और उंगलियों से निर्धारित इशारा करेगा, सेंसर उस मूवमेंट को पहचानकर सिस्टम तक संकेत पहुंचाएंगे। इसके बाद सिस्टम उस संकेत को संबंधित कमांड में बदलकर ग्लव में लगे स्पीकर के माध्यम से आवाज में प्रस्तुत करेगा।
छात्रों ने बताया कि प्रोटोटाइप मॉडल को अलग-अलग इशारों की पहचान के अनुसार प्रशिक्षित किया गया है। फिलहाल इसमें निर्धारित साइन को पहचानकर उससे जुड़ा वॉइस आउटपुट देने पर काम किया गया है। टीम का लक्ष्य भविष्य में इसमें अधिक इशारों और शब्दों को शामिल करना है, ताकि उपयोगकर्ता अलग-अलग परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सके।
यह मॉडल अभी शुरुआती चरण में है और इसकी तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम जारी है। छात्रों का प्रयास है कि सेंसर से मिलने वाले संकेतों की सटीक पहचान हो और आवाज में बदलने की प्रक्रिया तेज व सहज बने। भविष्य में इसे हल्का, सुविधाजनक और रोजमर्रा के इस्तेमाल के अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। छात्रों के मुताबिक, तकनीक का उद्देश्य केवल एक प्रोजेक्ट तैयार करना नहीं, बल्कि संचार में आने वाली बाधा को कम करने के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।