Employees News: छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में एलएसजीडी परीक्षा के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। करीब एक हजार कर्मचारियों ने विभागीय अनुमति लिए बिना ही परीक्षा पास कर दो वेतनवृद्धियों का लाभ ले लिया।
Chhattisgarh Employees News: छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में एलएसजीडी परीक्षा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। प्रदेशभर के करीब एक हजार कर्मचारियों ने विभागीय अनुमति के बिना ही लोकल सेल्फ गवर्नमेंट डिप्लोमा (LSGD) परीक्षा में शामिल होकर न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि नियमों को दरकिनार करते हुए दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियों का लाभ भी ले लिया।
अब शिकायत सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही अवैध तरीके से मिली वेतनवृद्धि को तत्काल प्रभाव से रोकने और अब तक दी गई अतिरिक्त राशि की वसूली के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत तृतीय श्रेणी के नियमित कर्मचारियों को एलएसजीडी पाठ्यक्रम में शामिल होने की पात्रता दी गई है। इसमें कार्यालय अधीक्षक, मुख्य लिपिक, लेखापाल, सहायक वर्ग-2, सहायक वर्ग-3, कैशियर, राजस्व निरीक्षक, राजस्व उप निरीक्षक और सहायक राजस्व निरीक्षक जैसे पद शामिल हैं।
हालांकि विभागीय नियमों के अनुसार एलएसजीडी पत्राचार पाठ्यक्रम में शामिल होने और परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मिलने वाली दो वेतनवृद्धियों के लिए संचालनालय से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है। आरोप है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने बिना अनुमति लिए ही परीक्षा दी और वर्षों से बढ़ा हुआ वेतन तथा उस पर मिलने वाला डीए भी प्राप्त करते रहे।
सूत्रों के अनुसार, मामले की उच्चस्तरीय शिकायत मिलने के बाद विभाग ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। इसी के तहत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और क्षेत्रीय कार्यालयों को आदेश जारी किया है।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने संचालनालय की अनुमति के बिना एलएसजीडी परीक्षा देकर वेतनवृद्धि प्राप्त की है, उनकी अतिरिक्त वेतनवृद्धि तत्काल बंद की जाए। साथ ही अब तक दी गई अतिरिक्त राशि की वसूली की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। विभाग ने ऐसे कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी संचालनालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में अनियमितता इसलिए उजागर हुई क्योंकि एलएसजीडी पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए विभाग ने कई शर्तें तय कर रखी हैं। नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को प्रशिक्षण में भेजने से पहले संबंधित नगरीय निकाय की एमआईसी या पीआईसी से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है।
इसके अलावा निकाय का स्थापना व्यय 65 प्रतिशत से कम होना चाहिए, तभी प्रशिक्षण की अनुमति दी जा सकती है। कर्मचारी की न्यूनतम पांच वर्ष की नियमित सेवा पूरी होना अनिवार्य है और केवल 45 वर्ष से कम आयु के कर्मचारी ही इस पाठ्यक्रम के पात्र माने जाते हैं। विभागीय प्रावधानों में यह भी स्पष्ट है कि कोई भी कर्मचारी व्यक्तिगत स्तर पर पत्राचार पाठ्यक्रम से डिप्लोमा हासिल करने का पात्र नहीं होगा। बावजूद इसके बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर परीक्षा दी और वेतनवृद्धि का लाभ ले लिया।
विभागीय प्रक्रिया के तहत एलएसजीडी पाठ्यक्रम शुरू होने से कम से कम तीन महीने पहले संबंधित नगरीय निकाय को संचालनालय से अनुमति लेनी होती है। इसके लिए कर्मचारी की नियुक्ति या पदोन्नति आदेश, कार्यभार ग्रहण प्रतिवेदन और पिछले तीन वर्षों की आय-व्यय संबंधी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजना अनिवार्य होता है।
साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कर्मचारी को अगले तीन वर्षों तक किसी अन्य ऐसे प्रशिक्षण में शामिल नहीं किया जा सकता, जिसमें अतिरिक्त वेतनवृद्धि का प्रावधान हो। नियमों में यह भी उल्लेख है कि यदि कोई कर्मचारी परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाता है, तो उसे दोबारा पाठ्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।