Republic Day 2025: संविधान तैयार करने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में 1946 में बनाई गई संविधान सभा में 299 सदस्य थे। जिनमें से पांच सदस्य छत्तीसगढ़ से थे।
Republic Day 2025:रायपुर पत्रिका @ अनुराग सिंह। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर अंग्रेजों से संघर्ष को पूरा कर भारत में नए युग की शुरुआत हुई थी। हालांकि भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 में तैयार हुआ और संविधान सभा ने इसे अपनाया था।
संविधान तैयार करने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में 1946 में बनाई गई संविधान सभा में 299 सदस्य थे। जिनमें से पांच सदस्य छत्तीसगढ़ से थे। इनमें पं. किशोरीमोहन त्रिपाठी, रामप्रसाद पोटाई, पं. रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल और घनश्याम सिंह गुप्ता ने सभा के सदस्य के तौर पर अहम भूमिका निभाई। इन्होंने संविधान में हिंदी के महत्व पर अहम योगदान दिया था। मूल संविधान में इन सभी के हस्ताक्षर भी हैं।
पं. रविशंकर शुक्ल : संविधान सभा के सदस्य मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म सागर में हुआ था। उन्होंने संविधान निर्माण में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अहम भूमिका निभाई। वे संविधान सभा के हिन्दी उग्रवादी समूह के नेताओं में से एक थे। उन्होंने संविधान सभा को हिन्दी में संविधान बनाने के लिए प्रेरित किया और ’शुद्ध’ संस्कृतकृत हिन्दी के लिए पैरवी की।
13 सितम्बर 1949 को शुक्लजी ने राष्ट्रभाषा हिन्दी के पक्ष में लम्बा और ऐतिहासिक अभिभाषण दिया था। उनके प्रयास से ही अनुच्छेद 343 में प्रविधान किया गया कि भारत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। उनके कारण ही शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा गया। उन्होंने संविधान में फ़ारस से मिले स्वास्तिक को शामिल कराया।
पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी : भारतीय संविधान सभा के सदस्य रहे पंडित किशोर मोहन का ताल्लुक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से था। वे संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के भी सदस्य थे। बालश्रम को रोकने और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप पंचायती राज स्थापना जैसे विषयों को शामिल करने में पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी की अहम भूमिका रही।
रामप्रसाद पोटाई : कांकेर जिले की कन्हारपुरी गांव के रहने वाले थे रामप्रसाद जी। उन्हें रियासत के प्रतिनिधि के तौर पर संविधान सभा का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए संविधान में आवाज उठाई। रामप्रसाद पोटाई ने डॉ. भीमराव के साथ संविधान निर्माण में कदम से कदम मिलाकर अहम योगदान दिया।