Chhattisgarh Rice millers Action: रायपुर में कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलर्स पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पांच मिलर्स की करीब 11.50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली है।
Raipur Rice millers Action: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में कस्टम मिलिंग के तहत चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलर्स के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बार-बार नोटिस और चेतावनी के बावजूद चावल जमा नहीं करने पर पांच राइस मिलर्स की करीब 11.50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली गई है। मार्कफेड द्वारा बैंकों को पत्र भेजने के बाद बैंक गारंटी की राशि विभाग के खाते में ट्रांसफर की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद राइस मिलर्स में हड़कंप मच गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन मिलर्स ने तय समय में चावल जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक सभी राइस मिलर्स को अनुबंध के तहत 31 मार्च तक उपार्जन केंद्रों से उठाए गए धान के बदले कस्टम मिलिंग का चावल जमा करना अनिवार्य था। लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कई मिलर्स ने चावल जमा नहीं किया। शुरुआत में 74 राइस मिलर्स ऐसे पाए गए जिन्होंने निर्धारित अवधि तक चावल जमा नहीं किया था। विभाग ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अतिरिक्त समय दिया, लेकिन इसके बावजूद 32 मिलर्स ने चावल जमा नहीं किया। इनमें से 19 राइस मिलर्स ऐसे हैं जिन पर करोड़ों रुपये मूल्य का चावल जमा नहीं करने का आरोप है।
मार्कफेड के अनुसार जिन 19 राइस मिलर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, उन्होंने लगभग 70 करोड़ रुपये मूल्य का चावल जमा नहीं किया है। विभाग ने इन सभी की बैंक गारंटी जब्त करने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेज दिया है। प्रमुख मिलर्स में महालक्ष्मी पड्डी प्रोसेसिंग कंपनी, एमएस इंडियन राइस इंडस्ट्रीज, अमित एग्रो प्रोसेसिंग, अग्रोहा इंडस्ट्रीज, कोनार्क इंडस्ट्रीज, निर्मला राइस प्राइवेट लिमिटेड, गिदलानी राइस मिल, गुरुनानक राइस इंडस्ट्रीज, मां संतोषी उद्योग, कमल राइस मिल, गणपति राइसटेक, जेडी इंडस्ट्रीज, जय अंबे राइस मिल और अन्नपूर्णा एंड कंपनी सहित कई नाम शामिल हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संबंधित राइस मिलर्स को कई बार नोटिस जारी किए गए। पहले कारण बताओ नोटिस भेजा गया, फिर अंतिम चेतावनी भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद कई मिलर्स ने चावल जमा करने में रुचि नहीं दिखाई। लगातार देरी और जवाब नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बैंक गारंटी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अमित एग्रो प्रोसेसिंग राइस मिलर्स ने 26 हजार 332 टन से ज्यादा चावल जमा नहीं किया। इसकी कुल कीमत लगभग 6.58 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मिलर्स द्वारा बैंक में 9 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा की गई थी, जिसमें से करीब 6 करोड़ रुपये जब्त कर विभाग के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
महालक्ष्मी पड्डी प्रोसेसिंग कंपनी ने भी करोड़ों रुपये मूल्य का चावल जमा नहीं किया। विभाग के अनुसार कंपनी पर 8.39 करोड़ रुपये से अधिक कीमत का चावल बकाया है। कंपनी की बैंक गारंटी में जमा 10 करोड़ रुपये में से करीब 4.5 करोड़ रुपये जब्त कर लिए गए हैं। इसके अलावा राइस माउंट से 40 लाख रुपये, अन्नपूर्णा एग्रो से 28 लाख रुपये और जिनकुशल से करीब 25 लाख रुपये की राशि जब्त की गई है।
डीएमओ मार्कफेड रायपुर जशबीर सिंह बघेल ने कहा कि अंतिम नोटिस देने के बावजूद जिन मिलर्स ने चावल जमा नहीं किया, उनकी बैंक गारंटी जब्त की गई है और राशि विभाग के खाते में ट्रांसफर हो चुकी है। अन्य राइस मिलर्स के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए बैंकों को पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी धान और चावल से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश के राइस मिलर्स में चिंता बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक यदि जल्द चावल जमा नहीं किया गया तो संबंधित मिलर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, लाइसेंस संबंधी प्रतिबंध और अन्य कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी धान खरीदी और कस्टम मिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके।