
रायपुर@राहुल जैन। Rural Women Digital Divide: गांवों में महिलाओं की बैंक खातों तक पहुंच शहरों से बेहतर है, लेकिन अपने मोबाइल फोन के इस्तेमाल में वे काफी पीछे हैं। यह बात हम नहीं, बल्कि एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट कहती है। इसके मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र की 94 प्रतिशत महिलाओं के पास ऐसा बैंक या बचत खाता है, जिसका इस्तेमाल वे स्वयं करती हैं। शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा 91.2 प्रतिशत है। इसके उलट, अपना मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली ग्रामीण महिलाओं का प्रतिशत 41.5 है, जबकि शहरी क्षेत्र में यह 71 प्रतिशत है। यानी मोबाइल फोन के इस्तेमाल में दोनों के बीच 29.5 प्रतिशत अंक का अंतर है।
यह अंतर केवल मोबाइल फोन की उपलब्धता का सवाल नहीं है। डिजिटल भुगतान, बैंक खाते की जानकारी, ऑनलाइन लेनदेन और सरकारी सेवाओं तक खुद पहुंच बनाने में मोबाइल की अहम भूमिका है। ऐसे में बैंक खाते वाली महिलाओं के पास अपना मोबाइल नहीं होने या उसका स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल नहीं कर पाने से डिजिटल वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में व्यावहारिक बाधाएं आ सकती हैं। हालांकि, मोबाइल बैंकिंग का वास्तविक इस्तेमाल जानने के लिए अलग आंकड़ों की जरूरत होगी।
एनएफएचएस-6 में महिलाओं के स्वयं इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खातों का आंकड़ा 93.4 प्रतिशत है, जबकि एनएफएचएस-5 में यह 80.3 प्रतिशत था। यानी 13.1 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। वहीं, अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का आंकड़ा 40.7 प्रतिशत से बढ़कर 47.8 प्रतिशत हुआ है। इसमें 7.1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोनों संकेतकों की प्रगति बताती है कि बैंक खाते तक पहुंच और मोबाइल तक पहुंच की रफ्तार में अंतर है।
दरअसल, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने वादा किया था कि वो महिलाओं को हर महीने 1 हजार रुपए महीने देंगी। भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में महतारी वंदन योजना की शुरुआत हुई। इसमें दी जाने वाली राशि सीधे बैंक अकाउंट में दी जानी थी। इस वजह से बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने बैंक खाते खुलवाएं, लेकिन मोबाइल का उपयोग नहीं करने की वजह से उनको नुकसान भी उठाना पड़ता है। उनके पास समय पर शासकीय योजनाओं की भी जानकारी नहीं मिल पाती है।