
Raipur Bilaspur NH-130: अजय रघुवंशी की रिपोर्ट. कल्पना कीजिए, रात में तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर टकरा जाती है। सामने मजबूत कंक्रीट का डिवाइडर है, यानी सीधी टक्कर होने पर कार और उसमें बैठे लोगों को जोरदार झटका लग सकता है, मौत भी हो सकती है। अब ऐसे संवेदनशील स्थानों पर डिवाइडर के आगे एक ऐसा सुरक्षा उपकरण लगाया गया है, जो टक्कर की ताकत को अपने अंदर सोखने का काम करेगा। इसे ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर कहा जाता है। आसान भाषा में इसे हाइवे का ‘सेफ्टी कुशन’ कह सकते हैं।
वाहन इससे टकराता है तो यह तुरंत रोकने के बजाय टक्कर की ताकत को कम करते हुए वाहन की गति घटाने में मदद करता है। इससे कार के साथ उसमें बैठे लोगों को लगने वाला झटका भी कम हो सकता है। साथ ही जान भी बचाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ में इस तकनीक का पहला प्रयोग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर 29 संवेदनशील स्थानों पर किया गया है।
नारायणपुर, टेमरी, चंदखुरी, बैतलपुर, मनिहारी, मुढ़ीपार और नांदघाट समेत कई जगहों पर यह सुरक्षा कवच नजर आ रहा है। एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से भी वाहनों के टकराने पर यह इंजीनियरिंग सिस्टम वाहनों को सुरक्षित करेगा। इस तकनीक को आगे अन्य दुर्घटनाजन्य स्थानों पर भी लगाया जा सकता है।
एनएचएआई ने इन उपकरणों को ऐसे स्थानों पर लगाया है, जहां तेज रफ्तार वाहन के किसी स्थायी ढांचे से टकराने की आशंका ज्यादा रहती है। इनमें फ्लाईओवर से पहले के हिस्से, डिवाइडर के अंतिम छोर, सर्विस रोड के कट पॉइंट और अन्य संवेदनशील स्थान शामिल हैं। एनएच-130 के सिमगा-बिलासपुर मार्ग पर नारायणपुर, सरगांव, दुलदुला, बाईकोनी, टेमरी, चंदखुरी, बैतलपुर, मनिहारी, बिल्हा, दौराभाठा, मुढ़ीपार, नांदघाट और हथबंध समेत कई स्थानों पर यह सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
एनएचएआई में बिलासपुर प्रोजेक्ट डायरेक्टर मुकेश परगनिहा ने बताया कि ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर इंजीनियरिंग पर आधारित एक सुरक्षा कुशन है। पारंपरिक कंक्रीट बैरियर या दीवार से वाहन टकराने पर सारा प्रभाव वाहन और यात्रियों पर पड़ता है, जिससे जानलेवा चोटें आती हैं। इसके विपरीत, इम्पैक्ट एट्यूनेटर में क्रशेबल मटेरियल, हाइड्रोलिक सिस्टम और ऊर्जा-शोषक (एनर्जी ऑब्जर्विंंग) बैरियर का उपयोग किया जाता है। जब कोई वाहन इससे टकराता है, तो यह प्रणाली टक्कर की गतिज ऊर्जा (काइनेटिक एनर्जी) को अपने अंदर अवशोषित कर लेती है और वाहन को अचानक रोकने के बजाय धीरे-धीरे उसकी गति कम करती है, जिससे झटका कम लगता है और सवारियों की जान बच जाती है।
नया सिस्टम : डिवाइडर से टकराए वाहन तो ट्रैफिक एट्यूनेटर संभालेगा झटका
-100 किमी. स्पीड पर भी दुर्घटना में नुकसान को काफी कम कर देगा
प्रयोग : 29 संवेदनशील स्थानों पर
हाईवे-एनएच-130
मार्ग- रायपुर बिलासपुर
तकनीक-ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर
मुख्य उद्देश्य- टक्कर की ऊर्जा को सोखकर नुकसान की गंभीरता कम करना
प्रमुख स्थान- सिमगा, नारायणपुर, सरगांव, दुलदुला, बाईकोनी, टेमरी, चंदखुरी, बैतलपुर, मनिहारी (भोजपुरी के पास), बिल्हा, दौराभाठा, मुढ़ीपार, नांदघाट और हथबंध आदि।