दक्षिण बस्तर में साल 2005 में नक्सलियों के खिलाफ ग्रामीणों ने हुंकार भरी थी इसे सलवाजुड़ूम नाम दिया गया इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ सरकार ने भी सपोर्ट किया
रायपुर .नक्सलियों को खत्म करने के लिए बस्तर टाइगर नाम से जाने वाले महिंद्रा कर्मा ने सलवाजुड़ूम अभियान की शुरुआत की थी।
नक्सलियों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाने की तैयारी की
4 जून 2005 को सरकार के संरक्षण में शुरू हुए इस अभियान में बड़ी संख्या में आदिवासियों को हथियार थमाए गए थे।
3. उन्हें स्पेशल पुलिस आफिसर यानी (SPO) का दर्जा दे कर माओवादियों से लड़ने के लिए मैदान में उतार दिया गया था।
सरकारी शिविरों में रहने के लिये बाध्य हो गई। कई लाख लोग बेघर हो गये। सैकड़ों लोग मारे गए।
दिया।
6. नक्सलियों से लड़ने के नाम पर शुरू हुए सलवा जुडूम अभियान पर आरोप लगने लगे कि इसके निशाने पर बेकसूर आदिवासी हैं। कहा गया कि दोनों तरफ़ से मोहरे की तरह उन्हें इस्तेमाल किया गया। यह संघर्ष कई सालों तक चला।
7. माओवादी 'सलवा जुडूम' से काफी नाराज थे। मानवाधिकार कार्यकताओं ने सलवा जुडूम को खून संघर्ष बढ़ाने वाला अभियान बताया। उन्होंने इसके औचित्य पर प्रश्नचिन्ह उठाए।
8 . माओवादियों ने भी मासूम गांववालों को जनता की अदालत लगाकर मौत के घाट उतारा। सलवा जुडूम आपसी रंजिश का बदला लेने का हथियार बनाने लगे। इसकी आड़ में अवैध उगाही की खबरें भी आईं
9. सलवा जुडूम से नक्सलियों पर काफी असर पड़ा। जिससे नक्सलियों ने सलमा जुडूम को खत्म करने के लिए कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी।
10. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडूम मामले में सरकार की कड़ी आलोचना की। 5 जुलाई 2011 को सलवा जुडूम को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला सुनाया गया