
रायपुर@ राकेश टेम्भुरकर। Property Gift Tax Rules Chhattisgarh: प्रॉपर्टी गिफ्ट करने पर स्टॉप ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क अनिवार्य रूप से देना पड़ेगा। किसी व्यक्ति को गिफ्ट डीड के माध्यम से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने पर उसे सेल डीड के समान 6 फीसदी स्टांप ड्यूटी और 4 फीसदी रजिस्ट्रेशन शुल्क देना पड़ेगा। वहीं महिला को गिफ्ट दिए जाने पर भी पूरी स्टांप ड्यूटी और किसी रिश्तेदार को देने पर स्टांप ड्यूटी मात्र 1.5 फीसदी और रजिस्ट्रेशन फीस केवल 500 रुपए देना होगा।
रायपुर के सीए चेतन तारवानी ने बताया कि अपनी प्रॉपर्टी किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से ट्रांसफर किया जाना चाहिए। प्रॉपर्टी ट्रांसफर के मुख्य रूप से सेल डीड, गिफ्ट डीड, हक त्याग विलेख तथा बंटवारा के जरिए किया जाता है। उक्त सभी माध्यमों में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, इनकम टैक्स एवं जीएसटी के अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं।
कई बार लोग अपनी संपत्ति किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदने और पारिवारिक बंटवारा होने के बाद भी विधिवत डीड नहीं बनवाते है। इसके चलते भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसे देखते हुए कानूनी प्रक्रिया अपनाकर कम खर्च में अपनी प्रॉपर्टी को व्यवस्थित किया जा सकता है।
स्टांप एक्ट के तहत रिश्तेदारों में पिता, माता, पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पोता-पोती, नाती-नातिन, सगा भाई एवं सगी बहन को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन या संपूर्ण बिल्डिंग किसी को गिफ्ट करने पर जीएसटी लागू नहीं होता। इसी तरह इनकम टैक्स के प्रावधानों के तहत गिफ्ट देने वाले व्यक्ति पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, गिफ्ट लेने वाले व्यक्ति के रिश्तेदार नहीं होने पर प्रॉपर्टी का मूल्य 50 हजार रुपए से अधिक पर राशि प्राप्तकर्ता की आय में जोड़ दी जाती है। वहीं रिश्तेदार होने पर इनकम टैक्स भी नहीं लगता ।
इनकम टैक्स अधिनियम में रिश्तेदारों की परिभाषा में जीजा, भाभी, पति या पत्नी के भाई-बहन, उनके जीवनसाथी, माता-पिता के भाई-बहन एवं उनके जीवनसाथी सहित स्वयं एवं अपने जीवनसाथी की तीन पीढ़ियों ऊपर और नीचे तक के रिश्तेदार शामिल किया गया है। इसमें गिफ्ट डीड प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना आसान है, जिसमें स्टांप ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क अपेक्षाकृत कम और इनकम टैक्स प्लानिंग भी की जा सकती है। लेकिन, एक बार प्रॉपर्टी गिफ्ट कर ने के बाद उसे वापस लेना संभव नहीं होता।
इसलिए यदि माता-पिता अपने बच्चों को संपत्ति देना चाहते हैं, तो वसीयतनामा अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। जिससे जीवनकाल तक संपत्ति पर उनका अधिकार सुरक्षित रहता है। वहीं यदि भाइयों के बीच पहले से बंटवारा हो चुका है या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति हस्तांतरित करने पर संबंधित व्यक्ति के नाम गिफ्ट डीड कराना बेहतर विकल्प हो सकता है।