
रायपुर। CG News : नगर निगम के जिम्मेदार शहर के लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। खुले प्लॉटों और निर्माण स्थलों को लेकर नियम-कायदों की धज्जियां उड़ रही है। फिर भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही है। शहर के बीच लाखेनगर में एक निर्माण स्थल के बेसमेंट की खुदाई तो तलैया नुमा जितनी गहराई में की गई, परंतु वहां न ग्रीननेट लगाया गया और न ही टीन शेड से घेरा। नतीजा, मंगलवार को उस गड्ढे में डूब जाने से दो मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलते ही उन बच्चों के घरों में कोहराम बच गया। मोहल्ले के लोग भी शोक में डूब गए।
ऐसी घटनाएं न हो, यह जिम्मेदारी निगम प्रशासन की है। क्योंकि नगर निवेशक विभाग ही नक्शा पास करता है। तो नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी भी उसी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की है। यदि नियमों का पालन करा लिया गया होता तो ऐसी दर्दनाक घटना नहीं होती। क्योंकि नक्शा स्वीकृति के आदेश में नियम-शर्तों का पालन अनिवार्य लिखा हुआ होता है।
हैरानी ये कि लाखेनगर के जिस जगह दो मासूमों की जान निर्माण के बेसमेंट में लबालब भरे पानी में डूब जाने से हुई है, उसके दोनों तरफ मकान बने हुए हैं। पीछे तरफ जगह खाली पड़ी हुई है, फिर भी उस खतरनाक जगह का कोई घेराव नहीं कराया गया है। ऐसा ही हाल सड़कों पर खतरनाक गड्ढों के कारण कब बड़ा हादसा हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। निगम के जिम्मेदार एसी कमरों में बैठकें करके केवल हादसे रोकने की बातें ही कर रहे हैं।
घोर लापरवाही का नतीजा
निगम में नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे एवं भाजपा पार्षद दल के प्रवक्ता मृत्यंजय दुबे ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि निगम प्रशासन के घोर लापरवाही का नतीजा है। बारिश के समय 10 से 15 फीट बेसमेंट की खुदाई करके छोड़ दिया गया था, ऐसी जगहों पर निगम के नगर निवेशक विभाग के जिम्मेदारों को नजर रखनी चाहिए। लेकिन, निगम में भर्राशाही का आलम है।
जोन ऑफिस से ठीक पीछे हुआ हादसा
नगर निगम के जोन-5 कार्यालय के ठीक पीछे यह दर्दनाक हादसा हुआ है। जबकि इस कार्यालय में पूरा अमला बैठता है। निर्माण का नक्शा पास भी इसी कार्यालय से हुआ। फिर भी सुरक्षा को लेकर घोर लापरवाही बरती गई।