रायपुर

प्रदेश की सेहत ‘वेंटीलेटर’ पर: 3 करोड़ की आबादी पर सिर्फ 1800 डॉक्टर, कैसे सुधरेगी सेहत

छत्तीसगढ़ की सेहत ‘वेंटीलेटर’ पर है। प्रदेश की 3 करोड़ की आबादी पर सिर्फ 1800 डॉक्टर हैं। बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश की सेहत कैसे सुधरेगी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रदेश में 30000 डॉक्टर होने चाहिए। इस प्रकार मानक से 94% कम चिकित्सक हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रति 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। […]

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Feb 12, 2026
प्रदेश की सेहत 'वेंटीलेटर' पर: 3 करोड़ की आबादी पर सिर्फ 1800 डॉक्टर, कैसे सुधरेगी सेहत

छत्तीसगढ़ की सेहत 'वेंटीलेटर' पर है। प्रदेश की 3 करोड़ की आबादी पर सिर्फ 1800 डॉक्टर हैं। बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश की सेहत कैसे सुधरेगी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रदेश में 30000 डॉक्टर होने चाहिए। इस प्रकार मानक से 94% कम चिकित्सक हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रति 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। इस हिसाब से प्रदेश को 30 हजार डॉक्टर की जरूरत है।

उपलब्ध डॉक्टर केवल 6 फीसदी

उपलब्ध डॉक्टर केवल 6 फीसदी है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यही नहीं सरकारी व निजी अस्पतालों में महज 35 हजार बेड है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर व तीन बेड होने चाहिए। इस हिसाब से प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। अस्पतालों में बेड भी अपर्याप्त है। यही कारण है कि कई बार आंबेडकर समेत दूसरे सरकारी अस्पतालों में एक बेड पर दो मरीजों का इलाज किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी।

35 हजार में केवल 9610 बेड सरकारी अस्पतालों में

प्रदेश के अस्पतालों में 35 हजार में केवल 9610 बेड सरकारी अस्पतालों में है। यह कुल बेड का 25 फीसदी है। यानी तीन चौथाई बेड निजी अस्पतालों में है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों में किस तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में 700 बेड का सेटअप है, लेकिन 1300 से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया जाता है। डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ 700 बेड के अनुसार है। इससे डॉक्टर समेत बाकी स्टाफ पर काफी वर्कलोड है।

90 हजार बेड की जरूरत

प्रदेश में आबादी के हिसाब से 90 हजार बेड की जरूरत है। उपलब्ध बेड 38.88 फीसदी ही है, जो काफी कम है। 30 हजार के आसपास डॉक्टर होने चाहिए, जो महज 1800 है। यह जरूरत का महज 6 फीसदी है। नेहरू मेडिकल कॉलेज को छोड़कर अन्य 9 मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी नहीं है। यही स्थिति जिला अस्पतालों की है। दुर्ग, बिलासपुर व अंबिकापुर जिला अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं है। अस्पतालों में न जनरल फिजिशियन है और न गायनेकोलॉजिस्ट। यहां तक जनरल सर्जन व हड्डी रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है।

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