Raipur Health Report : थैलेसीमिया मरीज जिंदगीभर ब्लड सपोर्ट पर जिंदा रहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को एक महीने में 2 बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। लोग पहले अपने बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट नहीं करवा पाते थे क्योंकि ये इलाज काफी खर्चीला है।
Raipur Health Report : रायपुर समेत पूरा विश्व आज थैलेसीमिया दिवस मना रहा है। छत्तीसगढ़ में फिलहाल थेलेसीमिया से पीड़ित 570 बच्चे हैं। अच्छी बात ये है कि अब बच्चे इस बीमारी से छुटकारा पा रहे हैं। ये संभव हो पाया बोनमैरो ट्रांसप्लांट की वजह से। वैसे तो इस इलाज पर 25 से 30 लाख रुपए का खर्च आता है। लेकिन, सरकार और समाजसेवी संस्थाओं की मदद से बच्चों को अब मुफ्त इलाज मिल रहा है।
सरकार ने दी 20 लाख रूपये की स्वीकृति
बीते 5 सालों में 35 बच्चे इस बीमारी से हमेशा के लिए आजाद हो गए हैं। इनका इलाज मुंबई, बेंगलुरु और वेल्लूर में करवाया गया है। 15 बच्चों का ट्रीटमेंट अब भी जारी है। दरअसल, थैलेसीमिया मरीज जिंदगीभर ब्लड सपोर्ट पर जिंदा रहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को एक महीने में 2 बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। लोग पहले अपने बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट नहीं करवा पाते थे क्योंकि ये इलाज काफी खर्चीला है। 2017 में सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत इस इलाज के लिए 20 लाख रुपए स्वीकृत किए। बाकी पैसों का इंतजाम समाजसेवी संस्थाएं डोनेशन के जरिए कर रहीं हैं। इसी के चलते प्रदेश में थैलेसीमिया मरीजों का बेहतर इलाज संभव हो पाया है।
18 हजार की एचपीएलसी जांच मुफ्त तो 45 बच्चे स्वस्थ जन्मे
थैलेसीमिया आनुवांशिक रोग है। समान लक्षण वालों की शादी से होने वाला बच्चा थैलेसीमिया की चपेट में आ सकता है। ऐसे में गर्भवती होने के 12 से 18 हफ्तों के भीतर एचपीएलसी जांच की सलाह दी जाती है। इससे पता चलता है कि बच्चा स्वस्थ है या पीड़ित है। 2020 तक छत्तीसगढ़ में ये जांच नहीं होती थी। अन्य राज्यों में जांच 18 हजार लग रहे थे। कोरोनाकाल में काश फाउंडेशन की काजल सचदेव ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से यह इलाज मुफ्त कराने की मांग की। मंत्री ने इसे पूरा भी किया। जांच के लिए 20 हजार रुपए की स्वीकृति दी।
रायपुर के अस्पतालों में जांच
रायपुर के अस्पतालों में अब यह जांच हो रही है। अब तक 55 महिलाएं 18 हजार की एचएलपीसी जांच मुफ्त करवा चुकी हैं। इस वजह से 45 स्वस्थ बच्चों ने जन्म लिया। बाकी जो 10 बच्चे बड़े थैलेसीमिया की चपेट में थे, उनका गर्भपात कर दिया गया।