रायपुर

सबरीमला ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी है ऐसे प्राचीन मंदिर, जहां महिलाएं नहीं कर सकती प्रवेश

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित मावली माता और नरसिंहनाथ मंदिर में महिलाओं ने लगभग पिछले 200 सालों से कदम नहीं रखा है।
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Oct 18, 2018
devi temple
सबरीमला ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी है ऐसे प्राचीन मंदिर, जहां महिलाएं नहीं कर सकती प्रवेश

दाक्षी साहू@भिलाई. केरल के सबरीमला मंदिर में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भले ही महिलाओं को हरी झंडी दे दी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के एक-दो नहीं बल्कि आधा दर्जन प्राचीन मंदिरों में आज भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित मावली माता और नरसिंहनाथ मंदिर में महिलाओं ने लगभग पिछले 200 सालों से कदम नहीं रखा है।आइए जानते हैं ऐसे मंदिरों और उससे जुडी मान्यताओं के बारे में....

बालोद जिले के पुरुर में आदिशक्ति मावलीमाता मंदिर में गर्भवती स्त्री के साथ उसके पति का भी मंदिर प्रवेश वर्जित है।यहां के बैगा (पुजारी) के अनुसार एक बार सपने में भू-गर्भ से निकली माता मावली दिखाई दीं। माता ने उस बैगा से कहा था कि वह अभी तक कुंवारी हैं, इसलिए उनके दर्शन के लिए महिलाओं का यहां आना वर्जित रखा जाए। तब से इस मंदिर में सिर्फ पुरुष ही दर्शन के लिए आते हैं। कुछ ऐसी ही परंपरा का पालन दुर्ग जिले के अंडा में स्थित जय सहोदर राउत बाबा नरसिंहनाथ मंदिर में किया जाता है। मंदिर का प्रसाद नाबालिग लड़कियां खा सकती हैं, पर मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकतीं।

जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर छिंदनार गांव के जंगल में है। इस मंदिर को मुकड़ी मावलीमाता मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर की सीढ़ियों पर भी महिलाओं के लिए पाप है। मंदिर की ख्याति प्रेम की देवी के रूप में है। प्रेमी जोड़े साथ आते हैं, लेकिन सिर्फ प्रेमी ही मंदिर में प्रवेश कर पाता है।

कांकेर के नरहपुर ब्लॉक के रिसेवाड़ा के उमादेवी मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। 11वीं सदी के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां महिलाओं के प्रवेश करते ही गांव में विपदा आती है। यही कारण प्राचीन मंदिर के पट महिलाओं के लिए सदियों से बंद है। इन मान्यताओं के चलते कई सालों से किसी स्त्री ने प्रवेश नहीं किया है।

Updated on:
18 Oct 2018 12:58 pm
Published on:
18 Oct 2018 12:58 pm