रायपुर

Petrol Diesel: रायपुर में पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं, पाइपलाइन से हो रही सप्लाई, रोजाना 15 लाख लीटर की खपत

Petrol Diesel: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढऩे के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े। उनके अनुसार सरकार द्वारा दी गई छूट का असर सीधे रिटेल कीमतों में कमी के रूप में नहीं दिखेगा।

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Mar 29, 2026

Petrol Diesel: प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की खपत लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, लेकिन फिलहाल सप्लाई को लेकर किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है। रायपुर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के सचिव अभय भंसाली ने बताया कि राजधानी में ही रोजाना पेट्रोल की खपत करीब 5 लाख लीटर और डीजल की खपत लगभग 9 लाख लीटर तक पहुंच रही है।

वहीं पूरे छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन पेट्रोल की खपत करीब 15 लाख लीटर और डीजल की खपत लगभग 40 लाख लीटर है। उन्होंने बताया कि राजधानी से लगे लखौली में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई मुख्य रूप से पारादीप से पाइपलाइन के जरिए होती है। यही वजह है कि आमतौर पर सप्लाई बाधित नहीं होती और बड़े संकट की स्थिति नहीं बनती।

दाम नहीं बढ़े यही बड़ी बात

केंद्र सरकार द्वारा दी गई हालिया छूट से आम उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलेगी और क्या इसका असर सीधे रिटेल कीमतों पर दिखेगा, भंसाली ने स्पष्ट कहा कि इससे आम जनता को सीधे तौर पर कोई राहत नहीं मिलेगी। यह एक इंटरनल एडजस्टमेंट है। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग सभी देशों में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाए गए हैं, लेकिन भारत में कीमतें नहीं बढ़ाई गईं।

ऐसे में इसे ही राहत माना जाना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढऩे के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े। उनके अनुसार सरकार द्वारा दी गई छूट का असर सीधे रिटेल कीमतों में कमी के रूप में नहीं दिखेगा, बल्कि इसका उद्देश्य तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करना और कीमतों को स्थिर रखना है ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

डिपो और स्टॉक से मिलती है राहत

रायपुर और बिलासपुर में प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो मौजूद हैं, जहां पर्याप्त स्टॉक रखा जाता है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार देश में करीब 60 दिनों का रिजर्व स्टॉक बनाए रखने की व्यवस्था रहती है, जिससे अचानक संकट की आशंका कम हो जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की ज्यादा मांग

जानकारी के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में डीजल की खपत ज्यादा है, क्योंकि खेती-किसानी, ट्रैक्टर और पानी की मोटर जैसे अधिकांश उपकरण डीजल पर ही निर्भर हैं। इसके चलते डीजल की डिमांड पेट्रोल के मुकाबले काफी अधिक बनी रहती है।

इलेक्ट्रिक वाहनों का असर अभी सीमित

बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदगी बढ़ रही है, लेकिन अभी इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। लोगों में जागरुकता बढऩे के बावजूद बैटरी की ऊंची कीमत और रिसेल वैल्यू को लेकर चिंता के कारण पेट्रोल-डीजल वाहनों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

तकनीकी निगरानी से मिलावट पर रोक

पेट्रोल पंपों पर आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जो पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक और पासवर्ड आधारित होती हैं। इनमें किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका बेहद कम होती है। यदि किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो मशीन तुरंत संकेत दे देती है जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध ईंधन मिल सके।

Published on:
29 Mar 2026 07:15 am
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