Ayushman Bharat Yojana: आंबेडकर अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत टोटल हिप और नी रिप्लेसमेंट ऑपरेशन फिर से शुरू हो गया है।
Ayushman Bharat Yojana: आंबेडकर अस्पताल में टोटल हिप-नी रिप्लेसमेंट शुरू हो चुका है। इससे हड्डी के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। जरूरी इंप्लांट की सप्लाई नहीं होने से नवंबर 2024 से यह ऑपरेशन बंद था। इसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में कैश देकर ऑपरेशन कराना पड़ रहा था।
दरअसल आयुष्मान भारत योजना में निजी अस्पतालों के पैकेज में हिप-नी रिप्लेसमेंट शामिल नहीं है। वहीं आंबेडकर में इस पैकेज पर कैशलेस इलाज शुरू किया जा रहा है। निजी में इसमें डेढ़ से दो लाख रुपए खर्च हो रहा था। अब मरीजों को इलाज के लिए आंबेडकर में पैसे देने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
रिप्लेसमेंट शुरू होने से कूल्हे एवं घुटने की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार गठिया, ऑस्टियो आर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, दुर्घटना या लंबे समय से जोड़ों के दर्द से पीडि़त मरीजों के लिए यह सर्जरी जरूरी है। सर्जरी के पश्चात मरीज सामान्य जीवन की ओर तेजी से लौट पा रहे हैं।
‘पत्रिका’ ने कई बार रिप्लेसमेंट बंद होने से मरीजों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया था। ऑर्थोपीडिक विभाग के एचओडी डॉ. आरके दास का कहना है कि मरीज हिप (कूल्हे) या नी (घुटने) की पुरानी समस्या को नजरअंदाज न करें। बाद में यह गंभीर रूप ले सकता है।
इन सर्जरी के माध्यम से मरीजों को लंबे समय से चले आ रहे असहनीय दर्द से स्थायी राहत मिलती है। यही नहीं उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर का कहना है कि लंबे समय बाद 8 मरीजों का रिप्लेसमेंट किया गया है। यहां अत्याधुनिक तकनीक, मानक प्रोटोकॉल एवं अनुभवी चिकित्सकों की टीम सर्जरी कर रही है।
Ayushman Bharat Yojana: आंबेडकर अस्पताल व एसीआई में वेंडरों का बकाया भुगतान नहीं होने के कारण बायपास सर्जरी बंद है। हिप-नी रिप्लेसमेंट भी इसी कारण बंद था। अब स्टेट नोडल एजेंसी ने अस्पताल प्रबंधन के खाते में 13 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं। इस पैसे को वेंडरों को भुगतान किया जाएगा ताकि जरूरी सामानों की नियमित सप्लाई हो सके।
आर्थोपीडिक विभाग में पुराने रेट पर वेंडर सप्लाई करने से मना कर रहे थे, इसलिए हिप-नी रिप्लेसमेंट एक साल से ज्यादा समय तक बंद रहा। कई बार कार्डियोलॉजी विभाग में भी सामानों की सप्लाई नहीं होने से एंजियोप्लास्टी बंद हो जाती है। रेडियो डायग्नोसिस विभाग में डीएसए मशीन में लगने वाले सामानों की सप्लाई बंद होने से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। बंद मशीन ठीक नहीं हो पा रही है, क्योंकि मशीन का जीवन खत्म हो गया है।