New Trauma Centre: आंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कई बार बेड नहीं मिलता। सभी मरीजों को बेड मिले इसलिए ट्रामा सेंटर का अपग्रेडेशन किया जा रहा था। हालांकि अपग्रेडेशन अटक गया है। न्यू ट्रामा की नींव खुदने के बाद काम बंद है। अपग्रेडेशन के बाद बेड की संख्या […]
New Trauma Centre: आंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कई बार बेड नहीं मिलता। सभी मरीजों को बेड मिले इसलिए ट्रामा सेंटर का अपग्रेडेशन किया जा रहा था। हालांकि अपग्रेडेशन अटक गया है। न्यू ट्रामा की नींव खुदने के बाद काम बंद है। अपग्रेडेशन के बाद बेड की संख्या बढ़कर 60 से ज्यादा हो जाएगी। इससे मरीजों का इलाज स्ट्रेचर के बजाय बेड पर होने लगेगा।
न्यू ट्रामा सेंटर के लिए कोरोनाकाल यानी 2020 के पहले सवा करोड़ रुपए का फंड मिल चुका है। एल-2 न्यू ट्रामा सेंटर अब तक अधूरा होने से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अक्टूबर 2024 में डीन नियुक्त होने के बाद डॉ. विवेक चौधरी ने पत्रिका से बातचीत में सबसे पहले न्यू ट्रामा का काम पूरा करवाने की बात कही थी, ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का बेहतर इलाज हो सके।
हालांकि सवा साल गुजरने के बाद इस काम में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। न्यू ट्रामा बिल्डिंग के ऊपर क्रिटिकल केयर बनाने की योजना के कारण ट्रामा का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। जबकि बेस के लिए गड्ढे की खुदाई हो चुकी है। यह आंबेडकर प्रतिमा के ठीक पीछे, वर्तमान ट्रामा से लगा हुआ बनाया जाएगा। अभी लेवल-3 का ट्रामा सेंटर, अपग्रेडेशन के बाद लेवल-2: अभी अस्पताल का ट्रामा लेवल-3 कैटेगरी का है, जो अपग्रेडेशन के बाद लेवल-2 का हो जाएगा।
दिल्ली, बेंगलूरु, मुंबई, चेन्नई व कोलकाता आदि मेट्रो शहरों के ट्रामा लेवल एक का रहता है। ट्रामा के अपग्रेड होने से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का बेहतर इलाज हो पाएगा। तत्काल इलाज मिलने से गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। अभी ट्रामा के तहत आंबेडकर में ऑर्थोपीडिक्स, मेडिसिन, जनरल सर्जरी विभाग है। जबकि न्यूरो सर्जरी विभाग डीकेएस में संचालित हो रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को दोनों जगह भर्ती किया जा रहा है। जरूरत पडऩे पर हेड इंजुरी के मरीजों को डीकेएस शिफ्ट किया जा रहा है।
New Trauma Centre: न्यू ट्रामा सेंटर के ऊपर क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनेगी। इसके लिए 4 हजार वर्गमीटर जगह की जरूरत है। अभी केवल 2 हजार वर्गमीटर जगह है। इस कारण भी न्यू ट्रामा का काम रोक दिया गया है। कम जगह में सीसीयू कैसे बन सकती है, जिसके लिए आर्किटेक्ट से राय ली जा रही है।
सीसीयू बनने से गंभीर मरीजों का भी बेहतर इलाज हो जाएगा। अभी जो जगह है, उसमें सीसीयू के लिए जगह छोटी ड़ेगी। इसलिए अस्पताल प्रबंधन काम आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। काम रुकने से न केवल न्यू ट्रामा, बल्कि सीसीयू का काम भी अटक गया है।
डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 190 बेड का न्यूरो सर्जरी वार्ड है, जहां इमरजेंसी व रूटीन में आने वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। यह वार्ड हमेशा फुल रहता है। इसलिए अस्पताल प्रबंधन न्यूरो सर्जरी वार्ड के एक्सटेंशन का प्लान बना रहा है। हालांकि यह प्लान केवल कागजों में है। राजधानी व प्रदेश में सडक़ दुर्घटना लगातार बढ़ रही है। ब्रेन हेमरेज व ब्रेन स्ट्रोक के मरीज भी काफी आ रहे हैं। बेड तो कम पड़ ही रहे हैं, वेंटिलेटर फुल होने के कारण भी समस्या बढ़ गई है। सिर में चोट वाले मरीज इमरजेंसी में आते हैं।