
बिलासपुर. राष्ट्रीय सेवा योजना डीपी विप्र महाविद्यालय के स्वयंसेवकों द्वारा गुरुवार को विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day 2021) के अवसर पर वृक्षारोपण, वॉल पेंटिंग, जल संरक्षण, पक्षियों के लिए भोजन एवं जल की व्यवस्था एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता संदेश देने का काम किया गया। स्वयंसेवकों ने कहा कि पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम इतना तो करें कि पॉलिथीन के उपयोग को नकारें, कागज का इस्तेमाल कम करें और रिसाइकल प्रक्रिया को बढ़ावा दें, क्योंकि जितनी ज्यादा खराब सामग्री रिसाइकल होगी, उतना ही पृथ्वी का कचरा कम होगा।
यह ऑनलाइन जन जागरूकता कार्य डीपी विप्र महाविद्यालय प्राचार्य डॉ अंजू शुक्ला के मार्गदर्शन में कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर रीना ताम्रकार एवं कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर यूपेश कुमार के सफल नेतृत्व में संपादित किया गया। कार्यक्रम में गीता प्रसाद जायसवाल,ओमप्रकाश विश्वकर्मा, नम्रता पांडेय, रीना यादव, सभ्या श्रीवास, साकेत चंद्रा, नीलम टोंडर, हेमलता महिलांग, साक्षी साहू, पाल्या पांडेय, विभांशु अवस्थी, छाया निषाद एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्य स्वयंसेवकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे जन जागरूकता अभियान की प्रशंसा महाविद्यालय प्राचार्य डॉ अंजू शुक्ला, डॉ मनीष तिवारी, श्री अविनाश शेट्टी, डॉक्टर विवेक अंबालकर, डॉक्टर एमएस तंबोली, प्रोफ़ेसर विश्वास विक्टर सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा की गई।
दो दिन मनाया जाता है पृथ्वी दिवस
दुनियाभर में साल में दो दिन 21 मार्च और 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है लेकिन, 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस का सामाजिक तथा राजनीतिक महत्व है। वैसे तो 21 मार्च को मनाए जाने वाले इंटरनेशनल अर्थ डे को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन हासिल है, लेकिन इसका वैज्ञानिक तथा पर्यावरण संबंधी महत्व ही है। इसे उत्तरी गोलार्ध के वसंत तथा दक्षिणी गोलार्थ के पतझड़ के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
लेकिन, दुनिया के अधिकांश देशों में अब 22 अप्रैल को ही World Earth Day 2021 मनाया जाने लगा। दरअसल, यह दिवस अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन की दिमाग की उपज है जो कई वर्षों से पर्यावरण को सभी के लिए एक राह खोजने में लगे थे। अमेरिका में इसे वृक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। 22 अप्रैल को ही विश्व पृथ्वी दिवस मनाए जाने के पीछे अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन रहे हैं। वे पर्यावरण को लेकर चिंतित रहते थे और लोगों में जागरूकता जगाने के लिए कोई राह बनाने के प्रयास करते रहते थे।