फैसला आते ही एक-दूसरे को बधाइयां दीं और हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ भाईचारा की परंपरा को बनाए रखा
रायसेन. अयोध्या मामले में फैसला आते ही शहर सहित जिले के लोगों ने संयम और शांति का अनोखा उदाहरण पेश किया। फैसले से पहले हुई शांति समिति की बैठकों और प्रशासन के प्रयासों के सार्थक परिणाम सामने आए।
लोगों ने शांति के संकल्प को पूरा किया। फैसला आते ही एक-दूसरे को बधाइयां दीं और हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ भाईचारा की परंपरा को बनाए रखा। हालांकि प्रशासन और पुलिस की सख्ती के चलते सुबह से शहर के बाजार नहीं खुले, लेकिन जैसे ही फैसला आया शहर के बाजार खुलना शुरू हो गए।
जनजीवन हमेशा की तरह सामान्य नजर आया। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे समय शहर में घूम कर स्थिति का जायजा लेते रहे। रात में भी पुलिस ने वाहनों के साथ फ्लैग मार्च निकाला।
कलेक्टर उमाशंकर भार्गव तथा एसपी मोनिका शुक्ला सुबह से ही नगर का भ्रमण करते रहे तथा नागरिकों से संवाद भी किया।
प्रतिबंध रहेंगे जारी
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश, फोटो, वीडियो आदि प्रसारित करने पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। साथ ही धारा १४४ भी जारी रहेगी। बिना अनुमति जुलूस, रैली, प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध जारी रहेंगे।
हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने टीवी पर साथ सुना फैसला
रायसेन में हिंदू मुस्लिम एकता और सौहार्द का उदाहरण पेश करते हुए हिंदू और मुस्लिम भाइयों ने साथ बैठकर टीवी पर फैसला की खबरें टीवी पर देखीं। जैसे ही मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला आया दोनों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं।
&हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
अदालत का फैसला देश में भाईचारे के लिए अच्छी पहल है। सभी को इसका स्वागत करना चाहिए। देश में अमन और सद्भाव बना रहे।
- जहीर उद्दीन, शहर काजी रायसेन
अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। हम इसका पूरा सम्मान करते हैं। सभी से अपील है कि शांति और सद्भाव बनाए रखें और अदालत के फैसले का सम्मान करें।
- यामीन खान, सदर मुस्लिम त्योहार कमेटी रायसेन
शहर सहित प्रदेश और देश में शांति और सद्भाव बना रहे। अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। हम फैसले का स्वागत और सम्मान करते हैं। शहर के लोग गंगा-जमुनी परंपरा को कायम रखेंगे।
-मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष हिंउस रायसेन
अयोध्या मामले में देश के सर्वोच्चय न्यायालय के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। मंदिर और मस्जिद दोनों का निर्माण होना चाहिए। देश की उन्नति और अमन, शांति के लिए सभी को योगदान देना चाहिए।
-अब्दुल कलीम खां, पूर्व सैनिक बरेली
सर्वोच्चय न्यायालय का निर्णय सर्वोत्तम है। ट्रस्ट के माध्यम से श्रीराम मंदिर का निर्माण और मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश स्वागत योग्य है।
- रामकुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष हिन्दू उत्सव समिति बरेली