सरकारी स्कूलों में दूषित पानी, शौचालयों में पसरी है गंदगी
रायसेन. मानसून में व्यवस्थित साफ-सफाई न होने के कारण पेयजल दूषित हो जाता है, जिससे अनेक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसी के चलते जिले के सरकारी स्कूलों में बेहतर साफ-सफाई न होने और दूषित पेयजल से अब क्षेत्र में डायरिया ने पांव पसारना शुरू कर दिया है।
हालत ये है कि दूषित पेयजल के कारण डायरिया से पीडि़त रोजाना १० से १५ मरीज इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी जिला शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को चिंता नहीं है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही ऐसी है कि बारिश में दूषित पानी से बचाव की सीख देना, सफाई के लिए बच्चों को प्रेरित करना तो दूर खुद स्कूलों के परिसर ही गंदगी की चपेट में हैं। स्कूलों में स्वच्छ पानी के भी इंतजाम नहीं हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए पत्रिका टीम ने शहर के ही शासकीय प्राइमरी व मिडिल स्कूलों सहित हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों का जायजा लिया, तो अधिकांश स्कूलों में पीने के पानी की टंकियां लंबे समय से गंदी पड़ी होने की समस्या मुख्य रूप से सामने आई। वहीं शौचालयों के अंदर और बाहर बड़ी मात्रा में गंदगी फैली नजर आई। अधिकांश स्कूलों के शिक्षक फंड की कमी का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए।
शासकीय प्राइमरी स्कूल गोपालपुर
शहर के शासकीय प्राइमरी स्कूल गोपालपुर में रखी एक प्लास्टिक टंकी के पानी का ही उपयोग बर्तनों की धुलाई साफ सफाई और बच्चों को पीने के पानी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। स्कूल परिसर में झाडिय़ां और गंदगी पसरी है। यहां हेडमास्टर सहित दो अन्य शिक्षक पदस्थ हैं। लेकिन शक्रवार को इकलौते शिक्षक के भरोसे बच्चे पढ़ाई करते मिले।
स्कूल में ६२ बच्चे अध्ययनरत हैं। हेडमास्टर सुनीता सक्सेना छह दिनों की ट्रेनिंग पर चली गई हैं, तो दूसरी शिक्षिका उर्मिला मेहर बीमार हैं।
इसके अलावा लंबे समय से इस प्राइमरी स्कूल के टॉयलेट गंदे पड़े मिले।
हाईस्कूल कलेक्ट्रेट कॉलोनी
इस स्कूल में भी दूषित पेयजल की समस्या नजर आई। स्कूल भवन की छत पर कहने को तो दो पानी की टंकियां रखी हुई हैं। मगर यहां सालों से इन पानी की टंकियों की सफाई नहीं हुई है। इसी परिसर में बने मिडिल स्कूल में पानी की टंकी खुले मैदान में रखी है। जहां आस-पास बड़ी तादाद में घांस उगा है, जिसमें बारिश का पानी भरा है। यहां पनपने वाले कीटाणु टंकी के पानी को दूषित कर रहे हैं।
यहां भी हालत खराब
प्राइमरी व मिडिल स्कूल नरापुरा, मिडिल स्कूल गवोईपुरा, शिकारीपुरा प्राइमरी स्कूलों में पेय जल की स्थिति ऐसी ही है। स्कूल परिसरों सहित शौचालयों और आस-पास गंदगी का आलम है।
नहीं मिलता है फंड
शासकीय स्कूलों में पीने के पानी और उनकी सफाई व्यवस्था के लिए कोई फंड नहीं मिलता है। शिक्षकों ने बताया कि शासन की ओर से प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं को ५ हजार रुपए वार्षिक आता है।
इतनी कम राशि में सारी व्यवस्थाएं करना बड़ा मुश्किल होता है। बताया जा रहा है कि शासन स्तर पर चपरासियों के पदों को खत्म कर दिया गया है। इसके चलते स्कूल परिसर में कचरा गंदगी और गंदा पानी भरा है।
& प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में फंड की कमी होती है। इसके लिए शासन ने एक परिसर योजना बनाई है। इसमें हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल के साथ परिसर में प्राथमिक मिडिल स्कूल भी लग रहे हैं। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल प्रबंधन इनकी मदद कर सकते हैं। अगर ऐसे स्कूल हैं और मांग भी आती है व्यवस्था कराई जाएगी।
आरपी सेन, जिला शिक्षा अधिकारी