ग्राम मुश्काबाद में पानी के लिए रहवासी खासे परेशान।पहाड़ी पर बसे गांव के लोग नीचे लगे हैंडपंप से पानी भरकर ला रहे।बरसात के मौसम में भी लोग पानी के लिए भटक रहे।
सलामतपुर. सरकार ग्रामीण अंचलों में जल जीवन मिशन के तहत हर घर में पानी पहुंचाने का दावा कर रही है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है। आज भी कई गांव के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात यह है कि दूर.दूर से पीने का पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। बारिश के दौरान भी क्षेत्र में जल संकट के हालात बने हुए है। ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के ग्राम मुश्काबाद में पिछले कई सालों से बनी है। जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड रहा है। गांव पहाड़ी किनारे ऊंचाई पर बसा हुआ है। गांव की महिलाओं को काफी नीचे से हैंडपंप से पानी भरकर ऊंचाई पर लाना पड़ता है। तब जाकर उन्हें पीने का पानी उपलब्ध हो रहा।
पानी भरने के लिए महिलाओं, बच्चों सहित घरों के बड़ों को भी जुटना पड़ रहा है।
गांव में पीने के पानी के लिए पीएचई विभाग ने नल जल योजना की स्वीकृति कराई। जैसे-तैसे गांव में पानी की टंकी बनी तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली कि अब समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन पानी की समस्या का निदान नहीं हुआ। क्योंकि गांव में पाइप लाइन नहीं बिछाई। ऐसे में छह माह बीत जाने के बाद भी टंकी अनुपयोगी साबित हो रही। अब पीएचई विभाग के ठेकेदार का कोई अता पता नहीं है। जिससे ग्रामीणों के अरमानों पर पानी फिर गया और नल जल योजना ठप पड़ी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी पीएचई के अफसर जल संकट से मुक्ति नहीं दिला पा रहे है।
पानी के लिए हो रहे विवाद
ग्रामीणों को हैंडपंप से पानी लाने को मजबूरी बनी हुई है। इतना ही नहीं पानी के नंबर को लेकर महिलाएं आपस में उलझते हुए देखी जा रही है। जब हैंडपंप पर ज्यादा भीड़ रहती है, तो ग्रामवासी पानी के लिए इधर.उधर भटक रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार अधिकारी नल-जल योजना पूरी होने का दावा करते हैं, लेकिन बिना पाइप लाइन बिछाए पानी कैसे मिलेगा। इसके चलते ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंप पर निर्भर बने हुए हैं। ग्राम के लोगों की जिला प्रशासन एवं स्थानीय विधायक से मांग है कि जल्द इस योजना को पूर्ण कराकर पेयजल उपलब्ध कराएं।
इनका कहना
गांव की जनता पानी के लिए परेशान है। पूरे गांव में एक ही हैंडपंप है, ऐसे में महिलाएं व बच्चे सुबह से ही पानी के लिए परेशान रहते हैं। नलजल योजना में पानी की टंकी तो बन गई, लेकिन आज तक शुरु नहीं हो पाई। पाइप लाइन आई थी, बाद में वो भी उठाकर ले गए। यदि शीघ्र ही हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हम आंदोलन करेंगे।
जाहिदा बी, स्थानीय महिला।
पानी भरने के चक्कर में हम लोग मजदूरी करने नहीं जा पा रहे। गांव में एक हैंडपंप है जो लगभग पचास घरों के पीने के पानी का सहारा है। यहां पानी की टंकी बनी तो हम लोग खुश हुए की अब पानी की समस्या समाप्त हो जाएगी, लेकिन समस्या जस की तस है।
सुमेर बाई, स्थानीय महिला
मुश्काबाद गांव में दो हैंडपंप है, लेकिन एक हैंडपंप का पानी पीने योग्य नही है। इस कारण पूरा गांव एक हैंडपंप के सहारे अपनी प्यास बुझा रहा है। नलजल योजना से पानी की टंकी तो बना दी गई वो भी 6 महीने से शोपीस बनी हुई है। क्योंकि पाइप लाइन नही बिछाई गई, जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे जिससे ग्रामवासी परेशान हैं।
राजेंद्र विश्वकर्मा, स्थानीय ग्रामीण