
प्रवीण श्रीवास्तव, रायसेन. जिले के रातापानी अभ्यारण को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। लगभग 4 साल से टाइगर रिजर्व के मापदंडों के अनुरूप अभ्यारण में कार्य किए जा रहे हैं। यहां वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ उनकी मॉनिटरिंग के लिए कई तरह के कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में अभयारण्य क्षेत्र में बसे लगभग 10 गांवों को विस्थापित करने की भी योजना है। वन विभाग ने ठेठ आदिवासी गांव नीलगढ़ और धुँधवानी को विस्थापित करने की तैयारी की है। इससे पहले कैरी चौका गांव का विस्थापन हो चुका है। रातापानी अभ्यारण के एसडीओ पुष्पेंद्र ठाकुर के मुताबिक नीलगढ़ और धुँधवानी का विस्थापन गोहरगंज के पास तारानगर क्षेत्र में किया जाएगा, हालांकि विस्थापन के लिए सुल्तानपुर के पास टोहरिया के पास की जमीन भी चिन्हित की गई है। वन विभाग द्वारा तारानगर को प्राथमिकता दी जा रही है। विस्थापन से पहले दोनों गांवों के निवासियों से सहमति के लिए चर्चा की जा रही है। सभी ग्रामीणों की सहमति के बाद ही विस्थापन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।
जमीन के साथ नगद राशि का मुआवजा
एसडीओ ठाकुर ने बताया कि स्थापित किए जा रहे गांवों के प्रत्येक परिवार को परिवार के सदस्य के मान से नगद राशि का भुगतान मुआवजा के रूप में किया जाएगा। इसके हर परिवार के वयस्क व्यक्ति को एक यूनिट मानकर प्रति यूनिट 15 लाख रुपये की राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी। विभाग ने मुआवजा देने के लिए एक और नीति बनाई है, जिसके अनुसार यदि किसी परिवार में 5 वयस्क सदस्य हैं तो उस परिवार के दो सदस्यों को प्रति सदस्य 15 लाख रुपए तथा तीन सदस्यों को अधिकतम चार एकड़ प्रति सदस्य जमीन दी जाएगी, ताकि परिवार नगद राशि से मकान बनाने के साथ कोई रोजगार शुरु कर सके और जमीन पर खेती भी कर सके। अपने गांव से विस्थापित होकर दूसरी जगह बसने में इन परिवारों को कोई आर्थिक समस्या नहीं आए, कोई परिवार बिखरे नहीं।
तारानगर नेशनल हाईवे के किनारे गोहरगंज के पास एक छोटा सा गांव है इसके आसपास वन विभाग की बहुत जमीन खाली पड़ी हुई है इसी जमीन पर नीलगढ़ और धुँधवानी को बसाया जाएगा, इससे ग्रामीणों को हाईवे के किनारे बसने का अवसर मिलेगा अभी तक यह ग्रामीण हाईवे से लगभग 30 किलोमीटर दूर जंगल में रहते हैं विस्थापन के बाद इनको समाज की मुख्यधारा से जुड़ने केअवसर भी मिलेगा।
दोनों गांव में 132 परिवार
नीलगढ़ और धुँधवानी, दोनों गांव रातापानी अभ्यारण में आस-पास बसे हुए हैं। इन दोनों गांवों में कुल 132 परिवार निवास करते हैं। इनमें नीलगढ़ में 65 परिवार रहते हैं, जिनके वयस्क सदस्यों की संख्या 104 है, जबकि धुँधवानी। में 67 परिवार रहते हैं और इनके वयस्क सदस्यों की संख्या 107 है।
इनका कहना है
रातापानी अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया के तहत 10 गांवों का विस्थापन करना है। इसी कड़ी में नीलगढ़ तथा धुँधवानी के निवासियों से सहमति ली जा रही है। इन गांवों को गौहरगंज के पास तारानगर में विस्थापित करने की योजना है
पुष्पेंद्र ठाकुर, एसडीओ रातापानी अभ्यारण्य