रायसेन

बड़े नोटों की जगह बैंकों से किसानों को मिल रहे छोटे नोट और चिल्लर

खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के चलते तमाम परेशानियां उठाते हुए किसान वैसे ही तंग आ गए थे।

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रायसेन. गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के चलते तमाम परेशानियां उठाते हुए किसान वैसे ही तंग आ गए थे। पर अब जब किसान भुगतान पाने के लिए बैंक शाखाओं में पहुंच रहे हैं। तो यहां भी उनकी मुसीबतों का अंत नहीं हो रहा है। यहां सुबह से दोपहर तक तीखी धूप में अव्यवस्थाओं के बीच एवं कतार में लगकर किसानों को भुगतान तो दिया जा रहा है। लेकिन जब किसानों के हाथों में भुगतान की राशि आ रही तो उन्हें यकीन नहीं हो रहा था। क्योंकि बैंकों से बड़े नोटों की जगह चिल्लर और छोटे नोट थमाए जा रहे थे।

किसानों का कहना है कि छोटे नोट दिए जाने से किसानों के सामने उन्हें सुरक्षित रखकर घर ले जाने की समस्या भी होने लगी है। उल्लेखनीय है कि गेहूं खरीदी का ज्यादातर भुगतान किसानों को जिला सहकारी बैंक से किया जा रहा है। वहीं जिला सहकारी बैंक को एसबीआई मुद्रा तिजौरी शाखा सहित अन्य प्राइवेट बैंकों से भुगतान की राशि मिलती है। जिला सहकारी बैंक के सीईओ आरपी हजारी ने बताया कि पिछले दिनों सिलवानी स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा से करीब तीन लाख रुपए की चिल्लर सहकारी बैंक शाखा को भुगतान के रूप में दी गई। वहीं एसबीआई शाखा से नोट के साथ चिल्लर लेने का दबाव डाला जा रहा है।

बताया जा रहा है कि बैंकों में बड़े नोटों की कमी है। इसलिए चिल्लर थमाई जा रही है। वहीं पर्याप्त मात्रा में मुद्रा तिजोरी शाखा से नकद राशि भी जिला सहकारी बैंक को नहीं दी जा रही है। जिससे किसानों को आधा भुगतान मिल रहा। चिल्लर और छोटे नोट रखने के लिए कई किसान झोला या बैग लेकर बैंक नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में राशि को सुरक्षित रूप से रखना चुनौती भरा साबित हो रहा है।
लगभग दो वर्ष पहले महामाया चौक रायसेन स्थित जिला सहकारी बैंक शाखा के सामने से एक किसान का नोटों से भरा थैला लेकर एक बालक भाग निकला था। इस मामले में आज तक आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सका।

जबकि जिला सहकारी बैंक यातायात थाने के सामने स्थित है।
गौरतलब है कि पहले भी इस तरह की घटनाएं किसानों के साथ घटित हो चुकी हैं।
पर्याप्त नहीं नकदी
जिला सहकारी बैंक से मिली जानकारी के अनुसार मुद्रा तिजौरी शाखा एसबीआई सहित प्राइवेट बैंकों से पर्याप्त मात्रा एवं मांग के अनुसार नगद राशि नहीं दी जा रही है। उधर एसबीआई से प्रतिदिन आठ करोड़ रुपए की मांग की जा रही है। मगर एसबीआई से तीन करोड़ रुपए भी बमुश्किल से मिल रहे। वहीं अन्य प्राइवेट बैंकों से हर दिन एक से दो करोड़ रुपए मांगे जा रहे हैं।

पर २० लाख रुपए से ६० लाख रुपए तक ही दिए जा रहे। जिला सहकारी बैंक को मांग के अनुसार नकदी नहीं मिल रही, जिससे किसानों को भुगतान में समय लगने लगा है। कई किसानों को आधा भुगतान मिल रहा। ऐसे में उनके सामने समस्या खड़ी होने लगी। क्योंकि इन दिनों वैवाहिक कार्यक्रमों का सिलसिला चल रहा है।
बाजार से बड़े नोट नदारत
इन दिनों बाजार और बैंक शाखाओं में बड़े नोटों की संख्या कम नजर आ रही है। किसानों को उपज के भुगतान में दस रुपए, बीस पचास और सौ रुपए के नोटों की गिड्डियों सहित चिल्लर भी थमाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि लगभग एक माह से इस बाजार में इस तरह की स्थिति बनी हुई है। बाजार में दुकानदारों के पास भी ग्राहकों के माध्यम से छोटे नोट ही प्राप्त हो रहे। बड़ी राशि के भुगतान में छोटे नोटों को रखने और सुरक्षित ले जाने में लोग परेशानी महसूस करते हैं।
अब तक इतनी मिली राशि
जिला सहकारी बैंक सीईओ आरपी हजारी ने बताया कि अप्रैल माह में अब तक ३५ करोड़ २० लाख रुपए का भुगतान १६ बार में किया गया है। जबकि आठ करोड़ प्रतिदिन मांगे जा रहे।

इसी तरह आईडीबीआई से सात करोड़ ८० लाख रुपए मिले। आईसीआईसीआई बैंक से १२ करोड़ रुपए सात बार में दिए गए। कोटक महिन्द्रा बैंक से दस बार में सात करोड़ २० लाख रुपए मिले। एचडीएफसी बैंक से १४ बार में २१ करोड़ ६० लाख रुपए प्राप्त हुए। एक्सिस बैंक से छह करोड़ २० लाख रुपए पांच बार में प्राप्त हुए। जबकि प्राइवेट बैंकों से प्रतिदिन एक से दो करोड़ रुपए की मांग की जा रही है।
&तीन दिनों से खाते में भुगतान की राशि चैक करवाने के लिए बैंक शाखा लगातार पहुंच रहा हूं। चौथे दिन उपज की राशि ६० हजार रुपए मिली तो उसमें दस और बीस रुपए के नोटों की संख्या ज्यादा थी।


शिवम मीना, किसान।
&दो दिन से लगातार भुगतान के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पैंसठ हजार रुपए भुगतान मिला, तो उसमें छोटे नोट दिए जा रहे। अब इन्हें घर तक सुरक्षित रखकर ले जाना मुश्किल काम है।
धीरज सिंह, किसान।

Published on:
27 Apr 2018 07:49 am
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