
रायसेन। दो दिन बाद यानी 28 दिसंबर को जिले को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे पूरा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी हर तरह के जतन कर रहे हैं। तय आंकड़ों तक पहुंचने के लिए कई तरीके निकाले जा रहे हैं। फिर भी वास्तविक ओडीएफ तक पहुंचना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
सितंबर में सांची में मुख्यमंत्री की जिले को 19 नवंबर तक ओडीएफ घोषित करने की घोषणा के बाद से एक बड़े अभियान के रूप में शुरू हुआ शौचालय निर्माण और इसके लिए लोगों को मनाने के काम में दिन रात एक करने के बाद भी शत प्रतिशत सफलता हासिल नहीं हुई है। ओडीएफ की समय-सीमा बढ़ाकर 28 दिसंबर की गई, लेकिन वांछित लक्ष्य अभी भी दूर है। हालांकि 95 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के दावे किए जा रहे हैं।
इस तरह की जा रही है खानापूर्ति
ग्रामीण अंचलों में पंचायतों को ओडीएफ करने के लिए जनपद सीईओ पूरे प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नियमानुसार एक परिवार एक शौचालय की नीति को अपने तरीके से लागू किया गया है, जिसमें एक परिवार में चाहे चार पुत्र हों और अलग-अलग रहते हों, लेकिन एक शौचालय बनाकर उस परिवार को ओडीएफ माना जा रहा है। पुराने शौचालयों की मरम्मत कराई जा रही है। नई सर्वे सूची के हितग्राहियों को एक या दो किश्त किश्त जारी कर शौचालय वाले घर की सूची में जोड़ा जा रहा है।
चार माह में 24 हजार का लक्ष्य
सितंबर में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद 24 हजार घरों में शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। जिसमें से 15 हजार हितग्राहियों को किश्त जारी कर गड्ढे खुदवाए गए थे। इसके साथ ही 2012 से पहले के शौचालयों की मरम्मत के लिए मनरेगा से राशि दी जा रही है। ताकि शौचालय उपयोग के काबिल हो सके। चार माह में 18 करोड़ रुपए हितग्राहियों को बाटे गए।
ये समस्याएं भी आईं सामने
शौचालयों का निर्माण कराने में लोगों की रुचि जगाने के प्रयासों के साथ कई और दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ी परेशान मिस्त्री और मजदूरों की रही है। इसी दौरान आवास योजना का काम भी तेज गति से चलने के कारण मिस्त्री ओर मजदूरों का मिलना मुश्किल हो रहा है। कई जगह तो दूसरे प्रदेशों से मजदूर बुलाकर काम कराया गया है। इसी तरह रेत नहीं मिलने की समस्या भी आई, जिसकी पूर्ति कई बार माइनिंग विभाग से जब्त रेत लेकर की गई।कई जगह ग्रामीणों का सरपंच या सचिव से विरोध होना भी शौचालय निर्माण में आड़े आया।
सबसे बड़ी चुनौती उपयोग की
अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि शौचालय बनने के बाद हितग्राही उसका उपयोग करें, ये बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। घर से बाहर शौच के लिए जाने की पुरानी आदत को छोडऩे ग्रामीण तैयार नहीं होते हैं। दूसरी समस्या पानी की आ रही है। पठार वाले, चट्टानी इलाकों में पानी की समस्या हर समय रहती है। ऐसे में शौचालयों का उपयोग होना मुश्किल हो रहा है। शौचालय का उपयोग कराने के प्रयास में कई बार संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना भी करना पड़ा है।
95 प्रतिशत की पूर्ति होने की उम्मीद
28 दिसंबर को जिले को ओडीएफ घोषित करना है। जिसके प्रयास किए जा रहे हैं। लगभग 95 प्रतिशत की पूर्ति हो जाएगी ऐसा विश्वास है। मुश्किलों के बावजूद जिले को ओडीएफ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- विनोद कुमार बघेल, जिला समन्वयक स्वच्छता अभियान
ग्रामीणों को उपयोग के लिए मनाना मुश्किल
ग्रामीणों को शौचालय का उपयोग करने के लिए मनाना मुश्किल हो रहा है। जैसे तैसे शौचालय बनवा दें तो ये समस्या सामने आती है। तय समय में पूरे ब्लॉक को ओडीएफ करने का प्रयास कर रहे हैं।
- आशीष जोशी, सीईओ जनपद उदयपुरा