पत्रिका बिग इम्पैक्टमोहनपुरा रेलवे ट्रैक डायवर्शन में सीआरएस इंस्पेक्शन के बाद हरकत में आया रेलवे-नोटिस जारी किए, चार्जशीट फाइल होगी, वरिष्ठ अधिकारी ने सेंट्रल विजिवलेंस को कार्रवाई के लिए लिखा-अधिकारियों के बाद अब ठेकेदारों की बारी, वसूली के साथ ही होगी एफआईआर
राजेश विश्वकर्मा
ब्यावरा.एक दिन पहले हुए crs inspection के बाद रेलवे विभाग हरकत में आया है। विवादों में रही मोहनपुरा ट्रैक डायवर्शन में हुई गड़बड़ी, भ्रष्टाचार मामले में चार अधिकारी नप गए हैं। उन पर चार्जशीट फाइल करने रेलवे अधिकारियों ने सेंट्रल विजिलेंस को लिखा है।
मामले में काम में मिली गड़बडिय़ों, गलत भुगतान और भ्रष्टाचार को लेकर तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीयिनर आर. के. पांडे (वर्तमान में वीआरएस प्राप्त), एक्जीक्यूटिव इंजीनियर लोकेश वर्मा, आईओडब्ल्यू प्रदीप तनेजा (वर्तमान में एसएससी वक्र्स सीनियर सेक्शन) और ए. एन. मिश्रा असिस्सेंट इंजीनियर कंस्ट्रक्शन पर कार्रवाई की गई है। मिश्रा पर आरोप हैं कि डिजाइन में ही इन्होंने गड़बड़ी कर दी थी। निरीक्षण के बाद आई गड़बडिय़ों और खामियों के बाद रेलवे अधिकारी एक्शन मोड में आए हैं। उन्होंने तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी कर चार्जशीट फाइल करने का सेंट्रल विजिलेंस को लिखा है। मामले में विजिलेंस टीम पहले ही जांच कर रही है। कार्रवाई के बाद बाद पांडे के रियायर्ड बेनिफिट रोक दिए जाएंगे। बाकि तत्कालीन आईओडब्ल्यू और एक्जीक्यूटिव इंयीनिजर पर अलग से कार्रवाई होगी।
पत्रिका की खबर बनीं कार्रवाई की आधार
207 करोड़ रुपए पांच साल पहले जल संसाधन विभाग से लेकर उसकी बंदरबांट करने में लगे रेलवे अधिकारियों और ठेकेदारों की गड़बड़ी को सिर्फ पत्रिका ने प्रमुखता से उजागर किया। सप्ताहभर से विभिन्न तरह की खामियां उजागर कीं और अलग-अलग मामलों से जिम्मेदारों को अवगत कराया। इसी आधार पर रेलवे अधिकारियों ने पहले जांच बैठाई। सीआरएस के समक्ष भी पत्रिका की खबरें काफी चर्चा में रही। तमाम पत्रिका की खबरें इस पूरी कार्रवाई का आधार बनीं हैं।
अधिकारियों के बाद अब ठेकेदारों की बारी!
मामले में पहले ही सेंट्रल विजिलेंस इसमें जांच कर रही है, कुछ ठेकेदारों से रिकवरी भी कर चुकी है। अब एफआईआर के साथ ही अन्य कार्रवाई करेगी। जिसमें संबंधित अधिकारियों से भी रिकवरी होने की उम्मीद है। अधिकारियों के नपने के बाद अब बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने वाले संबंधित ठेकेदारों पर गाज गिर सकती है। जिसमें ब्रिज के साथ ही अंडरपास और 20 करोड़ के आरओबी के मामले में कार्रवाई की उम्मीद है। इसमें न सिर्फ काम में गड़बड़ी हुई बल्कि सरिया गलत लगाया गया, दो-दो टेंडर लगाए गए और फिल्टर मीडिया में भी गड़बड़ी हुई। इन तमाम बिंदुओं के आधार पर पूरे ट्रैक डायवर्शन में की गई गड़बडिय़ों के आधार पर न सिर्फ रेलवे वसूली करेगा बल्कि एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।