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MP में बेखौफ सागौन माफिया! थाना चौकी से 2 KM रुकते हैं तस्कर, 4 जिलों-2 राज्यों का सिस्टम फेल

MP Sagwan Smuggling: मध्य प्रदेश में बेखौफ सागौन सिंडिकेट, 80 के दशक से सक्रिय गिरोह ने बदला सागौन तस्करी का तरीका, थाना-चौकी से सिर्फ दो किमी दूर रुकते हैं तस्कर, एक वनकर्मी के भरोसे है निगरानी, चार जिलों का पुलिस-वन अमला अपराधियों के आगे पड़ा कमजोर

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MP Sagwan Smuggling big network

MP Sagwan Smuggling big network (PHOTO:AI)

MP Sagwan Smuggling: जिले का सुठालिया क्षेत्र सागौन तस्करों का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। थाने, तहसील कार्यालय 9और वन चौकी से महज दो किलोमीटर दूर तस्करों के काफिले रुकते हैं। आगे के रास्तों की जानकारी जुटाते हैं और बेखौफ होकर सागौन से भरी बाइक राजस्थान की ओर रवाना कर दी जाती हैं।

राजगढ़की सीमा से गुना, विदिशा और भोपाल होते हुए राजस्थान तक फैला यह संगठित नेटवर्क चार जिलों के वन विभाग और पुलिस तंत्र पर भारी पड़ रहा है। हर रात जंगलों से सागौन की अवैध कटाई और तस्करी हो रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिस्टम पूरी तरह कमजोर नजर आ रहा है।

सुठालिया क्षेत्र इसलिए भी तस्करों का केंद्र है, क्योंकि यह कई जिलों की सीमाओं से जुड़ा है। तस्कर कालीपीठ थाना क्षेत्र और गुना जिले के बीनागंज इलाके को पार कर राजस्थान की ओर निकल जाते हैं। गंभीर स्थिति वन विभाग की है। पूरे क्षेत्र की निगरानी केवल एक कर्मचारी के भरोसे है। गश्त के लिए वाहन तक नहीं है। ऐसे में 30-40 लोगों के गिरोह पर कार्रवाई करना विभाग के लिए चुनौती है।

वैध सागौन महंगी, तस्करों का माल सस्ता

सुठालिया के फर्नीचर कारखानों को वैध सागौन केवल सागर और सीहोर डिपो से मिलती है। कीमत ज्यादा होती है। तस्करों से सस्ती लकड़ी आसानी से मिल जाती है। यही वजह है कि अवैध सागौन स्थानीय बाजार में खपने लगी है। तस्कर बड़ी मात्रा में लकड़ी राजस्थान के कोटा और मनोहर थाना क्षेत्र तक भेज रहे हैं। वहां सागौन की उपलब्धता कम होने और सख्त कानून नहीं होने का फायदा उठाकर एक सिल्ली 800 से 1000 रुपए तक में बेची जा रही है।

1980 से चल रहा नेटवर्क

वन विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, यह नेटवर्क 1980 से अलग-अलग रूपों में सक्रिय है। पहले तस्कर पैदल खेतों के रास्ते निकलते थे, फिर एक-दो बाइक का इस्तेमाल होने लगा। अब गिरोह के रूप में निकलते हैं ताकि रोकने पर हमला कर रास्ता बनाया जा सके। स्थानीय नेटवर्क के जरिए पूरे रूट की निगरानी की जाती है।

पर्यावरण पर असर

मध्य प्रदेश के जंगलों से सागौन की अवैध कटाई को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी बड़ा खतरा है। अगर अभी रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में इसके प्रतिकूल असर पर्यावरण पर साफ नजर आएगा।

जानें कैसे बदल रहा है तस्करी का तरीका

बताया जाता है कि पहले सागौन की तस्करी के लिए तस्कर पैदलर ही आते थे। और पैदल ही सागौन लेकर जाते थे। लेकिन फिर इसके लिए बाइक गैंग और स्थायी मुखबिरी बड़ा माध्यम बन गया। रास्तों पर रेकी की जाने लगी, ताकि पकड़ से बाहर रहा जा सके। पुलिस मूवमेंट की जानकारी अब पहले से ही पहुंचा दी जाती है। तस्कर अलर्ट हो जाते हैं। इस मामले पर ग्रामीण कुछ भी बोलने से लगातार बचते नजर आते हैं। कई चौंकियां ऐसी हैं जिन पर वाहन नहीं है। जंगल क्षेत्र बड़ा है और निगरानी के नाम पर केवल एक ही वनरक्षक, वहीं रात्रि गश्त में संयुक्त एक्शन भी कम ही नजर आते हैं।

चूंकि राजस्थान में सागौन की लकड़ी की मां सबसे ज्यादा है, इसीलिए इसकी मांग वहां बहुत ज्यादा है। कम कीमत पर आसानी से यहां इसकी खपत की जा सकती है।