
राजगढ़। रबी का सीजन चल रहा है और बोवनी के बाद किसान दूसरा पानी देने की तैयारी में है। लेकिन पानी के साथ उपयोग में आने वाली यूरिया खाद को लेकर किसान परेशान है। पहले से यूरिया की डिमांड होने के बाद सोसाइटियों में इसकी उपलब्धता न के बराबर है।
ऐसे में किसान निजी व्यापारियों की तरफ देख रहे है। जहां खाद की कमी के चलते कालाबाजारी का बाजार गर्म हो चुका है। यहां 270 में मिलने वाली यूरिया की बोरी को 320 से लेकर 350 तक में बेचा जा रहा है और किसान इस तरह मजबूर है कि वे जिस भी दाम पर यूरिया मिले। लेने के लिए तैयार है।
एक पर्ची पर सिर्फ दो बारी दी जा रही है खाद...
खाद को लेकर जगह- जगह किसान भटक रहे है। इसी कड़ी में जीरापुर के पास स्थित बामनगांव सोसाइटी में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। लेकिन जब रूक-रूक कर यूरिया और एक पर्ची पर सिर्फ दो बारी दी जा रही थी। जिसके बाद किसानों ने अभद्रता गालीगलौच शुरू कर दी।
हालात यह थे कि जब जाम लगाने तक की स्थिति बन रही थी। लेकिन मामला संभला। अभी भी यदि बात करे तो यूरिया की कमी पूरे जिले में है। यदि यही स्थिति रही तो किसानों के और आंदोलन देखने को मिल सकते है।
14 हजार में से सिर्फ तीन हजार मैट्रिक टन-
फिलहाल किसानों को जो यूरिया की जरूरत है। वह सरकारी आंकड़ों के अनुसार 14 हजार मैट्रिक टन के लगभग बताई जा रही है। लेकिन उसकी तुलना में सोमवार को पचोर में एक तीन हजार 500 मैट्रिक टन की रेक लगी। मांग की तुलना में पूर्ति न के बराबर है। यही कारण है कि आवश्यकता के अनुसार किसान भी न सिर्फ उपयोग बल्कि स्टाक को लेकर भी भटक रहे है।
वजन घटाया और दरों में मामूली कमी-
पिछले वर्ष की तुलना में इस साल 50 की जगह 45 किलो के वारदान में यूरिया आ रही है। पहले इसकी दर 298 रुपए थी।जिसमें 18 रुपए कमाते हुए पांच किलो वजन कम किया गया है। 45 किलो की बोरी अब 270 रुपए में दी जा रही है।
खाद की मूल कीमत-
डीएपी 1400 रुपए
सुपर 300
यूरिया 270
डीएपी और सुपर भरपूर मात्रा में है। लेकिन यूरिया की कुछ कमी है। अभी इसे देने में समय है। किसान परेशान न हो। 3500 मैट्रिक टन की रेक लग चुकी है और भी अभी यूरिया आना है।
बीएल मालवीय, जिला कृषि अधिकारी राजगढ़