32 गांवों के किसानों ने मोहनपुरा डैम पहुंच कर काम रुकवाया, अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया

पिछले दिनों किसानों द्वारा कलेक्ट्रेट में किए गए प्रदर्शन के बाद कलेक्टर की ओर से मिले आश्वासन की अवधि पूरी होने के बावजूद इस संबंध में कोई निराकरण नहीं होने के चलते ये कदम उठाया।

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Jan 31, 2016

राजगढ़। जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना मोहनपुरा डैम के डूब क्षेत्र में आ रही जमीन का मामला शुरू से ही विवादों में है। इस संबंध में पूर्व में 12 बार हो चुके प्रदर्शन, आन्दोलन और आश्वसन के बावजूद इस परियोजना में डूब में आ रहे करीब 32 गांवों के किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।

पिछले दिनों किसानों द्वारा कलेक्ट्रेट में किए गए प्रदर्शन के बाद कलेक्टर की ओर से मिले आश्वासन की अवधि पूरी होने के बावजूद इस संबंध में कोई निराकरण नहीं होने के चलते शनिवार को सभी 32 गांवों के सैकड़ों किसानों ने डैम स्थल पर पहुंच वहां काम रुकवा कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिवसिंह बामलाबे के नेतृत्व में दिए जा रहे इस धरने की जानकारी देते हुए किसान नारयण सिंह कोलूखेड़ा, करणसिंह मोहनपुरा, तवंरलाल सांईपुरिया, रामचंद्र बाईहेडा आदि ने बताया कि जब तब उनकी मांगों के संबंध में कलेक्टर या इनसे ऊंचे स्तर के अधिकारी धरना स्थल पर पहुंच उचित निराकरण नहीं करेंगे तब तक किसान वहीं जमे रहेंगे।

क्यों बने धरने के हालात

करीब 3500 करोड़ की इस सिंचाई परियोजना में नौ गांव पूरी तरह तो मोहनपुरा, टांडी, नाईहेड़ा, समेली, बांसखेड़ा, झुमका, मांडाखेड़ा, कोलूखेड़ा, डूंगरपुर, साईपुरियां, बलबीरपुर सहित करीब 40 गांव आंशिक रूप से डूब में आ रहे हैं। डैम के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुए लगभग तीन वर्ष का समय हो जाने के बावजूद अब तक सिर्फ शुरुआती नौ गांवों को ही मुआवजा मिल पाया है।

शेष गांवों में मुआवजे की प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है। इतना ही नहीं जिन गांवों को मुआवजा सूची में शामिल किया गया है वहां भी किसानों की जमीन को असंतित बताने के कारण मुआवजा राशि को लेकर काफी विसंगति है। ऐसे में कई बार आश्वासन के बावजूद कोई निराकरण नहीं मिलने के चलते अब किसानों ने डैम स्थल पर ही धरने की शुरुआत कर दी है।

किसानों ने मोहनपुरा का काम रोका है। जानकारी के बाद हम उनसे मिलने गए थे। वे तुरंत मनमाना मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले सहमति पत्र भरने को तैयार नहीं हैं। ऐेसे में बातचीत का हल नहीं निकल सका।
एमएस जैन, कार्यपालन यंत्री मोहनपुरा परियोजना
Published on:
31 Jan 2016 06:12 am
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