
राजगढ़। नेवज नदी के संरक्षण एवं पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में निकाली गई तीन दिवसीय नेवज चेतना यात्रा का ग्राम बारोल में समापन हुआ।
कार्यक्रम में विभाग संचालक लक्ष्मीनारायण चौहान व पूर्व विधायक हरिचरण तिवारी मुख्य रूप से मौजूद थे। यात्रा जैसे ही बारोल पहुंची सरपंच और ग्रामीणों ने यात्रा में शामिल यात्रियों का स्वागत किया। बाद में नेवज तट पर आरती का आयोजन किया। इस दौरान ग्राम चौपाल भी आयोजित की गई।
जिसे संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि सामाजिक सरोकार का यह मुद्दा स्थानीय समाज में चेतना जगाने का कार्य करेगा। राजगढ़ चौपाल के दल द्वारा की गई शुरुआत आगे चलकर और भव्य आकार लेगी। वहीं यात्रा के संयोजक मनोज हाड़ा ने कहा कि जिस तरह का सहयोग ग्रामीणों से मिला है। उससे विश्वास जागृत हुआ है कि नदी संरक्षण एवं पर्यावरण को लेकर सभी चिंतित है। उल्लेखनीय है कि यह पद यात्रा लगभग ४५ किमी की दूरी तय कर १६ गांवों में पहुंची। जहां ग्रामीणों से जल, जंगल व वायु पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर बापूसिंह तंवर, दीपक शर्मा, दिलवर यादव, अरविंद शर्मा, प्रेमसिंह राणावत, पवन शर्मा, चन्द्राकला चौहान सहित यात्रा के सहसंयोजक मार्तण्डसिंह, मुकेश विजवर्गीय, मनफूलसिंह, सतीश दुबे, गिरीराज शर्मा, भगवान राणावत, कमल तंवर, विक्रम, मनीष जोशी, प्रेमसिंह तोमर, भगवानसिंह, दुर्गाप्रसाद, जमनालाल बैरागी, विनोद साहू आदि मौजूद थे।
आज से हड़ताल पर जा रहे सहकारी बैंककर्मी
सहकारी बैंक के कर्मचारियों द्वारा रखी गई मांगों को पूरा नहीं करने के कारण अब वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे है।
जिले में बैंक सहित सहकारी संस्थाओं के करीब ५०० कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे। ऐसे में कई तरह की व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएगी। कर्मचारियों ने एक प्रेसवार्ता के माध्यम से बताया कि कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने सातवेंं वेतनमान की मांग को लेकर पिछले दिनों सहकारिता आयुक्त से चर्चा की थी, लेकिन उसमें कोई सार्थक जवाब सामने नहीं आया। इसके बाद सभी कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे है। अध्यक्ष सुरेन्द्रसिंह चौहान ने बताया कि हमारी मांगों में छठें वेतनमान की विसंगति को दूर करते हुए सातवें वेतन आयोग के कर्मचारियों के समान लागू किया जाए।
प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंकों के लाभ एवं हानि को आधार नहीं मानते हुए समान कार्य समान वेतन के आधार पर सातवां वेतन दिया जाए। इसको लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने के कारण हड़ताल का निर्णय लिया गया। हड़ताल से किसानों के भुगतान के साथ ही बीज वितरण की व्यवस्थाएं बिगड़ सकती है। अभी चना, मसूर का खासा भुगतान बचा है और ८० प्रतिशत खातें सहकारी बैंकों में है।